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छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में वन विभाग के एक अधिकारी पर गंभीर आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर पर रिश्वत मांगने, धमकी देने, मारपीट कराने और बाद में फर्जी एफआईआर दर्ज कराने का आरोप लगाया है। मामले में सरगुजा आईजी और मुख्य वन संरक
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जानकारी के मुताबिक, रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के ग्राम पंडरी के लोगों ने प्रभारी रेंजर शिवनाथ ठाकुर आरोप लगाया है। वन विभाग ने हाल ही में 43 लोगों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया था। इन नोटिसों में तीन दिनों के भीतर वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
हर महीने 5 हजार रुपए रिश्वत मांगने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि वे ग्राम पंचायत हरिगवां के निवासी हैं और ग्राम पंचायत पंडरी क्षेत्र में सड़क किनारे ठेला लगाकर चना-अंडा बेचकर अपना जीवन-यापन करते हैं। 7 जनवरी को प्रभारी रेंजर ने कथित तौर पर उनसे ठेला लगाने के एवज में हर महीने 5 हजार रुपए की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण रिश्वत देने में असमर्थता जताने पर रेंजर नाराज हो गए।
अतिक्रमण बताकर ठेला हटाने का दबाव
ग्रामीणों के अनुसार, उसी दिन दोपहर में रेंजर अन्य वन कर्मचारियों के साथ फिर मौके पर पहुंचे। उन्होंने अतिक्रमण का हवाला देते हुए ठेला हटाने का दबाव बनाया। इस दौरान कथित तौर पर गाली-गलौज, धमकी और मारपीट की स्थिति बनी। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके बुजुर्ग पिता के साथ मारपीट की गई, जिससे मौके पर तनाव फैल गया। बाद में ठेला हटा दिया।
निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि अगले दिन उनके खिलाफ थाने में फर्जी एफआईआर दर्ज कराई गई। इस एफआईआर में वन कर्मचारी के साथ मारपीट और वर्दी फाड़ने का आरोप लगाया गया है, जिसे ग्रामीण पूरी तरह निराधार बता रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आगे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।