पेंड्रा के मड़ई गांव में छेरछेरा तिहार महोत्सव का आयोजन किया गया। यह महोत्सव छत्तीसगढ़ी आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से मनाया जाता है।
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इस आयोजन में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक नृत्यों जैसे डंडा, सैला, रीना और करमा की प्रस्तुति हुई। सुआ और ददरिया के गीतों के साथ-साथ भरथरी जैसी पारंपरिक गायन शैलियों ने भी अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया।
महोत्सव में पारंपरिक वेशभूषा में सजे आदिवासी युवक-युवतियों की भारी भागीदारी देखने को मिली। उनके हाथों में पारंपरिक लोक सांस्कृतिक यंत्र थे।



सामाजिक विचारों की गोष्ठी भी आयोजित
इस अवसर पर सामाजिक विचारों की एक गोष्ठी भी आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों और समाज के वरिष्ठों ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति को सहेजने और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलने पर जोर दिया। मड़ई गांव में पिछले तीन वर्षों से यह आयोजन निरंतर हो रहा है और अब इसने एक बड़े महोत्सव का रूप ले लिया है।