Chhattisgarh Deep pressure formed in Bengal, possibility of rain | छत्तीसगढ़ में पारा 3-4 डिग्री तक लुढ़का: बंगाल में बने सिस्टम से हल्की बारिश की आशंका, अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर घना कोहरा – Chhattisgarh News

Author name

November 30, 2025


सरगुजा संभाग के जिलों में शीतलहर जारी है। अंबिकापुर में घना कोहरा छाया हुआ है।

छत्तीसगढ़ में अगले 2 दिनों में न्यूनतम तापमान 2 से 3 डिग्री तक बढ़ने की संभावना है। वहीं अगले 3 दिनों तक दक्षिण छत्तीसगढ़ के जिलों में हल्की बारिश के साथ बादल छाए रहने की आशंका है। इस बीच रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर सहित कई जिलों में रात का पारा 3-4 डिग्र

.

सरगुजा संभाग के जिलों में शीतलहर जारी है। अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे विजिबिलिटी लगभग 100 मीटर पहुंच गई है। वाहन चालकों दिन में भी लाइट जलाकर चलना पड़ रहा है।

मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में डीप प्रेशर एरिया बना हुआ है। इस वजह से दक्षिण और मध्य हिस्सों में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। इनमें बस्तर, धमतरी, महासमुंद और रायपुर-बिलासपुर संभाग के जिले शामिल हैं। पिछली रात से ठंड में बढ़ोतरी हुई है।

स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने कहा कि अचानक तापमान में उतार-चढ़ाव से हाइपोथर्मिया, सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए शीतलहर के दौरान अनावश्यक बाहर न निकलें, जरूरी होने पर ही यात्रा करें और पूरी तरह गर्म कपड़े पहनें।

पिछले 24 घंटों में राज्य का सबसे अधिक तापमान 28°C जगदलपुर और सबसे कम न्यूनतम तापमान 8.5°C अंबिकापुर दर्ज किया गया। वहीं पिछले दिनों यह तापमान 6 डिग्री तक पहुंच गया था। यह पिछले दस सालों में नवंबर के महीने का सबसे कम न्यूनतम तापमान है।

पहले देखिए ये 3 तस्वीरें…

सरगुजा संभाग में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर घना कोहरा छाया हुआ है।

सरगुजा संभाग में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर घना कोहरा छाया हुआ है।

कोहरे के कारण विजिबिलिटी घटकर 100 मीटर तक पहुंच गई है।

कोहरे के कारण विजिबिलिटी घटकर 100 मीटर तक पहुंच गई है।

पेंड्रा इलाके के गांवों और कस्बों में लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं।

पेंड्रा इलाके के गांवों और कस्बों में लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं।

नवंबर महीने का ठंड का रिकॉर्ड

नवंबर महीना छत्तीसगढ़ में आमतौर पर ठंड की शुरुआत का समय होता है, लेकिन मौसम विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि कभी यह महीना कड़कड़ाती ठंड लेकर आया तो कभी तेज गर्मी और बारिश का गवाह भी रहा।

मौसम विज्ञान केंद्र के पुराने आंकड़ों के अनुसार 2 नवंबर 1935 को अब तक का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 35.6°C दर्ज किया गया था। वहीं, 22 नवंबर 1883 को सबसे कम न्यूनतम तापमान 8.3°C दर्ज हुआ था जो अब तक नवंबर महीने की सबसे ठंडी रात मानी जाती है।

बारिश के रिकॉर्ड भी बने

नवंबर में सबसे ज्यादा बारिश 1924 में हुई थी, जब पूरे महीने में 138.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। इतना ही नहीं, 2 नवंबर 1930 को 24 घंटे के भीतर 70.4 मिमी बारिश हुई थी जो इस महीने के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा एकदिवसीय वर्षा रिकॉर्ड है।

मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ा

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम में मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। पिछले कुछ दिनों से रायपुर में दिन का तापमान लगातार प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा है। वहीं सूरज ढलते ही तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में ऑफिस जाने वाले, स्कूली बच्चों काे गर्म कपड़े साथ रखने चाहिए। ताकि अचानक तापमान गिरने का असर तबीयत पर न पड़े।

डॉक्टर बोले- सतर्क रहना जरूरी

डॉ जया बाजपेयी (MBBS DNB, मेडिसिन) बताया कि जिस तरह से तापमान बदल रहा है, बीमार होने का खतरा ज्यादा। खासकर ऐसे मौसम में मच्छर ज्यादा पनपते हैं, मलेरिया फैलने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में बीमारी से बचने सतर्क रहना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह है कि…

  • शाम के बाद घर और आसपास मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाले कॉइल/लिक्विड का उपयोग करें।
  • स्लीपिंग नेट (Insecticide Treated Net – ITN) या लॉन्ग लास्टिंग मच्छरदानी (LLIN) का उपयोग रात में जरूर करें।
  • घर के दरवाजे-खिड़कियों पर जाली लगाएं ताकि मच्छर अंदर न आ सकें।

पानी जमा न होने दें

  • कूलर, गमले, पुराने टायर, बाल्टी, बर्तन आदि में पानी जमा न रहने दें।
  • सप्ताह में कम से कम एक बार इन्हें साफ और सूखा करें।
  • नाली व ड्रेनेज सिस्टम खुला और साफ रखें।

शरीर को ढककर रखें

  • खासकर शाम के समय पूरी बांह के कपड़े और फुल पैंट पहनें।
  • बच्चों को भी हल्के लेकिन ढकने वाले कपड़े पहनाएं।

समय पर जांच और इलाज कराएं

  • यदि बुखार, ठंड लगना, पसीना आना, सिरदर्द या शरीर दर्द जैसे लक्षण हों, तो तुरंत ब्लड टेस्ट कराएं।
  • मलेरिया फैलने का आधार
  • तापमान 33-39°C (दिन में)
  • तापमान 14-19°C (रात में)

ऐसा तापमान मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल होता है। छत्तीसगढ़ में तापमान अभी इसी तरह का हो रखा है। यानी छत्तीसगढ़ में मलेरिया फैलने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। अगले आठ दिनों में मलेरिया संक्रमण का खतरा बढ़ा हुआ माना जा रहा है, खासकर ग्रामीण/जंगल क्षेत्रों में।

2 तरह के मलेरिया का खतरा

  • प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (गंभीर प्रकार का मलेरिया)
  • प्लास्मोडियम विवैक्स (सामान्य लेकिन बार-बार लौटने वाला मलेरिया) छत्तीसगढ़ में 11 नवंबर तक प्लास्मोडियम विवैक्स के बढ़ने का ही खतरा ज्यादा है। ऐसे में अपने आस-पास के इलाके में पानी जमा न होने दें। मच्छरदानी का उपयोग करें। फुल स्लीव के कपड़े पहनें। बुखार और सिरदर्द हो तो तुरंत जांच कराएं।

इन राज्यों में भी जोखिम

  • पूर्वोत्तर के ज्यादातर राज्य (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम आदि)
  • गुजरात, बिहार, झारखंड, ओडिशा, नागालैंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक
  • उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, और छत्तीसगढ़ के कुछ जिले

सर्दियों में इम्यूनिटी मजबूत करें

गर्म पानी से भाप लेना फायदेमंद

अगर बंद नाक की समस्या है तो गर्म पानी से भाप लेना बेहद फायदेमंद है। भाप नाक के जरिए हमारे शरीर में जाकर गर्मी पैदा करती है। नाक में जमा म्यूकस भाप की गर्मी से ढीला हो जाता है, जिससे बंद नाक की समस्या दूर हो सकती है।

इसके लिए एक बाउल में गर्म पानी लें। फिर सिर को एक कॉटन टॉवेल से ओढ़ लें। इसके बाद बर्तन का ढक्कन हटाकर 5 से 10 मिनट तक भाप लें।

गले में खराश होने पर करें नमक-पानी के गरारे

आमतौर पर गले में खराश वायरस के कारण होती है। नमक-पानी के गरारे से इसमें राहत मिलती है। अगर सर्दी-खांसी ज्यादा है तो नमक-पानी में तुलसी की कुछ पत्तियां भी मिला सकते हैं।

तुलसी में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो सर्दी-खांसी में काफी आराम पहुंचाते हैं। इसके लिए कम-से-कम एक कप गर्म पानी में एक चौथाई चम्मच नमक घोलकर गरारे कर सकते हैं।

विटामिन C रिच डाइट लें

विटामिन C एंटीऑक्सीडेंट्स का काम करती है, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाती है। विटामिन C की कमी से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। इसके लिए सर्दियों में विटामिन C से भरपूर चीजें जैसे संतरा, नींबू, आंवला को अपनी डाइट में शामिल करें। इससे न सिर्फ इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होगी, बल्कि वायरल इन्फेक्शन का खतरा भी कम होता है।

अदरक-तुलसी की चाय बेहद फायदेमंद

अदरक और तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया से लड़ने में मददगार हैं। इसकी चाय पीने से वायरल इन्फेक्शन से बच सकते हैं।

इसके अलावा तुलसी और अदरक का काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं। यह शरीर में जमे कफ को बाहर निकलता है। साथ ही सर्दी-ज़ुकाम, खांसी और गले की खराश में आराम दिलाता है।



Source link