गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला इन दिनों अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। छत्तीसगढ़ का यह जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांति और स्थानीय संस्कृति के अनूठे संगम के कारण विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद बन गया है।
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हाल के दिनों में जिले के ठाठपथरा और आसपास के क्षेत्रों में विदेशी मेहमानों की संख्या में वृद्धि हुई है। यहां के पारंपरिक ‘मड हाउस’ (मिट्टी के घर) पर्यटकों के बीच नया आकर्षण बन रहे हैं। जहां वे ग्रामीण जीवन और स्थानीय आतिथ्य का अनुभव कर रहे हैं।
जर्मनी से आए पर्यटक बर्नहार्ड और फेंजिस्का ने ठाठपथरा स्थित पारंपरिक मड हाउस में ठहरकर आदिवासी तीर-धनुष खेलों का आनंद लिया। उन्होंने ‘माई का मड़वा’ जैसे सांस्कृतिक स्थलों का भी भ्रमण किया और क्षेत्र की सादगी और आत्मीयता की सराहना की।

इंग्लैंड के दल ने हाट-बाजार घूमा
इसी तरह इंग्लैंड से आए एक दल ने ‘लमना मड हाउस’ में प्रवास किया। इस दल ने स्थानीय हाट-बाजार में घूमकर ग्रामीण उद्यम और जीवनशैली को करीब से देखा। उन्होंने प्राकृतिक जलस्रोत ‘ओगरा’ की पारिस्थितिक विविधता की भी प्रशंसा की।
छत्तीसगढ़ी अंदाज में किया गया स्वागत
स्थानीय समितियों ने विदेशी पर्यटकों का पारंपरिक छत्तीसगढ़ी अंदाज में स्वागत किया। उन्हें जैविक व्यंजन परोसे गए, जिनके स्वाद को पर्यटकों ने ‘अविस्मरणीय अनुभव’ बताया। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की बढ़ती लोकप्रियता न केवल क्षेत्र के पर्यटन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसरों के नए द्वार भी खोल रही है।



