गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में सुबह से तेज पानी बरस रहा है।
छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में सुबह से तेज बारिश हो रही है। रायपुर में भी बूंदाबांदी हो रही है, घने बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्से सूरजपुर और बलरामपुर में आज भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा
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बीते दिनों हुई बारिश और बादलों की वजह से प्रदेश के औसत तापमान में 4-5 डिग्री की गिरावट आई है। प्रदेश में बुधवार को 35.4°C डिग्री सेल्सियस के साथ दुर्ग सबसे गर्म रहा।
वहीं मानसून की बात करें तो मंगलवार तक यह प्रदेश के 75% हिस्सों में पहुंचा था। बुधवार को कोई खास बदलाव नहीं हुआ। हालांकि मौसम विभाग ने अगले दिनों तक सरगुजा संभाग के सभी जिलों में मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट है। अगले कुछ दिन सरगुजा में इसका सबसे ज्यादा असर दिखेगा।

पिछले 24 घंटे में 19.59 मिमी औसत बारिश
प्रदेश में पिछले 24 घंटों की बात करें तो 10 से ज्यादा जिलों में 19.59 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है। एक दिन पहले ही कोरबा और रायगढ़ में दोपहर के बाद झमाझम बारिश हुई थी। पिछले 25 दिनों से बस्तर में अटका मानसून रायपुर से होते हुए सरगुजा पहुंचा।

बारिश की तस्वीरें देखिए

गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में सुबह से तेज बारिश हो रही है।

कोरबा में एक दिन पहले घंटे भर जमकर बारिश हुई थी।

सरगुजा संभाग में मानसून दस्तक दे चुका है। यहां मेघ गर्जन के साथ जमकर बादल बरसे।

रायगढ़ में भी एक दिन पहले दोपहर के बाद मौसम बदला और तेज बारिश हुई।
16 दिन पहले आ गया था मानसून
इससे पहले छत्तीसगढ़ में नौतपे के बीच मानसून की एंट्री हो गई थी। प्रदेश में मानसून के पहुंचने की नॉर्मल डेट 13 जून है। लेकिन इस बार 16 दिन पहले ही मानसून ने दस्तक दे दी थी।
वहीं 64 साल के इतिहास में ये पहली बार है, जब मानसून मई माह में छत्तीसगढ़ पहुंचा था। इससे पहले साल 1971 में 1 जून को मानसून पहुंचा था

जून में अब तक सामान्य से कम बारिश
अब तक की बात करें तो जून में 33 में से 27 जिले (लगभग 82%) में बारिश सामान्य से कम रही है। सिर्फ 6 जिलों में बारिश सामान्य या उससे अधिक रही है। पूरे राज्य में औसतन 51% वर्षा की कमी है, जो सामान्य से कम मानी जाती है। इस समय मानसून की स्थिति कमजोर है और स्थिति यही रही, तो खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।
हालांकि मौसम विभाग की माने तो जून का ट्रेंड यही रहा है। शुरुआती 10 से 12 दिन गर्मी बढ़ती है। इसके बाद बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनने वाले लो प्रेशर एरिया या चक्रवातों के चलते मानसून सक्रिय हो जाता है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है।

पिछले साल के मुकाबले स्थिति बेहतर
हालांकि इस बार की स्थित पिछले साल के मुकाबले बेहतर है। साल 2024 में जून का अधिकतम तापमान 45.7°C था, जो 1 जून को दर्ज किया गया था। जबकि इस साल अधिकतम तापमान अब तक 42 से 43°C के आस-पास ही रहा है। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.5°C 19 जून को रिकॉर्ड किया गया था।
पिछले साल जून में पूरे महीने के औसत तापमान की बात करें तो 38.6°C रहा था। वहीं न्यूनतम औसतन तापमान 27.7°C दर्ज किया गया था।

मई में 374 फीसदी ज्यादा बारिश हुई थी
पिछले माह लगातार बने सिस्टम और करीब 14 दिन पहले आए मानसून ने पूरे छत्तीसगढ़ में मई महीने में जमकर बारिश कराई। इस दौरान औसत से 373 फीसदी ज्यादा पानी गिर गया। इसके बाद से मानसून पिछले करीब 12 दिनों से ठहरा है। यह आगे ही नहीं बढ़ रहा है।
छत्तीसगढ़ में 22 मई से 28 मई के बीच 53.51 मिलीमीटर औसत बारिश हो चुकी है। प्रदेश में मानसून में औसतन 1200 मिलीमीटर पानी बरसता है। पिछले साल 1276.3 MM पानी गिरा था।

प्रदेश के बदलते तापमान को दो इंफोग्राफिक से समझिए


गरज-चमक, बिजली और ओले गिरने के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
- गड़गड़ाहट सुनने के बाद घर के अंदर जाए या सुरक्षित पक्के आश्रय में रहें ।
- अगर कोई आश्रय उपलब्ध नहीं है तो तुरंत उखडू बैठ जाएं।
- पेड़ों के नीचे न ठहरें।
- बिजली लाइन से दूर रहें।
- इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग न करें।

लंबा रह सकता है मानसून
मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियम समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी।
इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है।