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आउटर क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। पिछले 30 दिनों में महज चार दिन गलियों में झाड़ू लगी और केवल चार दिन ही डोर-टू-डोर कचरा उठाने के लिए गाड़ियां पहुंचीं। हालत यह है कि घरों के बाहर कचरा ढेर लगने लगा है और नालियों की सफाई तो लगभग बंद हो गई है। स्वच्छता में लगे कर्मचारियों की एसआईआर में ड्यूटी लगा दिए जाने से पूरा सिस्टम चरमरा गया है।
आउटर के वार्डों में सड़क और गली सफाई का जिम्मा दिल्ली लायंस कंपनी के पास है। निगम हर माह कंपनी को लगभग 4 करोड़ रुपए का भुगतान करता है, लेकिन कंपनी के पास पर्याप्त टीम ही नहीं है। बीड सिस्टम के तहत सफाई का तय दायरा बनाकर रखा गया है, पर कर्मचारियों की भारी कमी के कारण नियमित सफाई नहीं हो पा रही। खासकर आउटर के जोन-2 और जोन-7 में हालात गंभीर है। यहां के कॉलोनियों में सप्ताह में एक दिन ही गलियों में झाड़ू लगाने कर्मचारी आते हैं। जोन-7 में डोर-टू-डोर कलेक्शन तो छोड़िए, कचरा उठाने वाली गाड़ियां भी एक सप्ताह में केवल एक बार पहुंच रही हैं।
लोगों को घरों के अंदर कचरा जमा करके रखने पर मजबूर होना पड़ रहा है। कूड़े के ढेर बढ़ने से बदबू फैल रही और बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। दूसरी तरफ नालियां भी जाम पड़ी हुईं हैं। निगम लोगों से सालभर का यूजर चार्ज 600 से 1000 रुपए तक वसूलता है, पर सफाई व्यवस्था जमीन पर दिख नहीं रही। आउटर में करीब 68 हजार मकान और दुकानें हैं। { झाड़ू लगी: सिर्फ 4 दिन { डोर-टू-डोर कलेक्शन: 4 दिन { बाकी दिन: सिस्टम पूरी तरह ठप आउटर में कुल मकान-दुकान { लगभग 68 हजार { सबसे ज्यादा {समस्याग्रस्त क्षेत्र: जोन-2 और जोन-7 स्वच्छता कर्मचारियों को एसआईआर ड्यूटी में लगा दिए जाने से डोर-टू-डोर कलेक्शन और सड़क सफाई दोनों प्रभावित हुई हैं। नियमित रूप से न पहुंच रही कलेक्शन गाड़ियों के कारण घरों व दुकानों के बाहर कचरा जमा होता जा रहा है। कई जगह लोग खुद ही कचरा ठिकाने लगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन व्यवस्था न होने से समस्या और बढ़ रही है। डोर-टूू-डोर कचरा कलेक्शन और गलियों की सफाई रोजाना होना है। इस संबंध में जोन कमिश्नरों और सेनेटरी इंस्पेक्टरों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं। – पूजा विधानी, महापौर