सुपेला स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल के नशा मुक्ति (OST) सेंटर में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। नशा छुड़ाने के लिए संचालित इस केंद्र में दी जाने वाली दवाइयों का दुरुपयोग कर नशाखोरी किए जाने के आरोप लगे हैं। भाजपा जिला महिला मोर्चा अध्यक्ष
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बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष स्वीटी कौशिक ने देखी सेंटर की फाइल।
स्वीटी कौशिक का आरोप है कि OST सेंटर में नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। नियम के अनुसार नशा छुड़ाने की दवाइयां अस्पताल परिसर में ही मरीजों को खिलाई जानी चाहिए, लेकिन यहां दवाइयां मरीजों के हाथों में दी जा रही थीं। इसी दौरान चार मरीजों के पास से इव्लिन (Evelyn) की चार शीशियां, लगभग चार सीसी दवा और OST पाउडर की अच्छी मात्रा बरामद की गई। आरोप है कि इन दवाओं का उपयोग मरीज इंजेक्शन के जरिए नशा करने में कर रहे हैं।

दवा ले जाते मरीजों से बात करते बीजेपी के कार्यकर्ता व डॉक्टरों की टीम।
सुपेला थाने में शिकायत स्वीटी कौशिक ने बताया कि लंबे समय से स्थानीय लोगों द्वारा OST सेंटर को हटाने या शिफ्ट करने की मांग की जा रही है। सेंटर के आसपास नशाखोरी, उपद्रव और असामाजिक गतिविधियों के कारण अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों, खासकर महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि नशा छुड़ाने के नाम पर यहां सस्ता नशा आसानी से उपलब्ध हो रहा है, जिससे नशे की लत और बढ़ रही है।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर थाना में की गई शिकायत।
रायपुर से निरीक्षण करने पहुंचे थे डॉक्टर बताया जा है कि रायपुर से डॉक्टर सुपेला के ओएसटी सेंटर का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इसकी जानकारी जब बीजेपी की महिला मोर्चा अध्यक्ष को लगी तो वे भी कार्यकर्ताओं के साथ सुपेला अस्पताल पहुंची। इस दौरान उन्होंने एक मरीज को बड़ी मात्रा में दवाई ले जाते हुए रंगे हाथ पकड़ा। जबकि यह दवा तत्काल मरीज को खिलाने की दवा है। रायपुर से पहुंचे डॉक्टर सोनवानी ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। वहीं OST सेंटर के डॉक्टर और स्टाफ संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए और गोल-मोल जवाब देते नजर आए। स्वीटी कौशिक ने इसे एक संगठित सिडिकेट की तरह काम करने का आरोप लगाते हुए सुपेला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

अस्पताल के बाहर मरीज के पास से मिली ये प्रतिबंधित दवाईयां।
लगातार विवादों में चल रहा सुपेला का ओएसटी सेंटर सुपेला का नशा मुक्ति केंद्र पिछले कुछ सालों से लगातार विवादों में है। लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। भाजपा महिला मोर्चा का कहना है कि चार-पांच मरीजों को जो दवा अस्पताल में दी जानी चाहिए थी, वही दवाएं बाहर ले जाते हुए पकड़ी गई हैं। यह न केवल स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही है, बल्कि नशा मुक्ति अभियान की मंशा पर भी सवाल खड़े करता है। फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं प्रशासन से मांग की जा रही है कि OST सेंटर को शिफ्ट किया जाए या कड़ी निगरानी में संचालित किया जाए, ताकि अस्पताल परिसर में शांति बनी रहे और नशा मुक्ति अभियान अपने उद्देश्य को सही मायनों में पूरा कर सके।