दुर्ग विश्वविद्यालय की पुरानी और नई बिल्डिंग की तस्वीर।
दुर्ग जिले के भिलाई में हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के भवन निर्माण का काम पूरा होने के बाद भी आज तक हैंडओवर नहीं हो सका है। विश्वविद्यालय का पूरा काम आज भी 48 साल पुराने भवन में हो रहा है। नई बिल्डिंग हैंडओवर न होने की वजह निर्माण में बरती गई लापरवाही
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नई बिल्डिंग को बने 1 साल ही हुए है जिसमें दीवारों में जगह-जगह दरार और सीलन पड़ गई है। लिफ्ट बंद पड़ी है। निर्माण के दौरान कार्यों की गुणवत्ता को सुधारने और मेंटेनेंस के लिए नए कुलपति ने पीडबल्यूडी को पत्र लिखा है। बताया जा रहा है कि सुधार कार्य के बाद ही इसे हैंडओवर लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

ये तस्वीर 1 साल पहले बने बिल्डिंग की है।
प्रशासनिक भवन की खामियों को सुधारने लिखा पत्र
दुर्ग विश्वविद्यालय के नए कुलपति प्रो. संजय तिवारी विवि की नई बिल्डिंग में किए गए कार्यों से खुश नहीं है। उन्होंने इसमें सुधार कार्य के लिए पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखा है। हालांकि पीडब्ल्यूडी की ओर से अब महीनों बीतने के बाद भी पत्र का कोई जवाब नहीं दिया गया है।
इस संबंध में कुलपति प्रो. तिवारी ने कहा कि कुछ खामियां थी, उन्हें सुधारने पत्र लिखा है। जल्द ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और हैंडओवर की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

दीवारों पर दरारें और पपड़ी उखड़ने लगी है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 5 करोड़, लेकिन हैंडओवर से पहले कई खामियां
बताया जा रहा है कि दुर्ग विवि की नई बिल्डिंग में लिफ्ट, रोड, ड्रेनेज, लैंड स्कैप व अन्य सौंदर्यीकरण के लिए 5 करोड़ रुपए दिए गए थे। लेकिन आज की स्थिति में दुर्ग विवि की नई बिल्डिंग में दो लिफ्ट बंद पड़े हैं। लिफ्ट के नीचे पानी भरा है जिसे अब तक नहीं निकाला जा सका है।
मेन गेट की सीढ़ी टूट रहे हैं। दीवारों पर सीपेज देखे जा रहे हैं। पार्किंग के शटर टूट रहे हैं। तीन में से दो बोर खराब हो चुके हैं, इसकी वजह से यहां पर पानी की समस्या है। ड्रेनेज सिस्टम भी फेल होने की वजह से मैदान में पूरा पानी जमा हो चुका है।

बिल्डिंग की लिफ्ट भी बंद पड़ी है।
दिव्यांगों के लिए रैंप तक नहीं बनवाए
दुर्ग विश्वविद्यालय की प्रशासनिक बिल्डिंग में दिव्यांगों के लिए रैंप तक नहीं बनाए गए हैं। न तो इंजीनियर ने इसका ख्याल रखा और न ही विश्वविद्यालय प्रबंधन ने। दुर्ग विश्वविद्यालय में संभाग के लाखों विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इसमें दिव्यांग विद्यार्थी भी शामिल हैं, जो कई कार्यों के लिए विवि आते हैं।
नए भवन में सीढ़ी इतनी ऊंची है कि दिव्यांगों को ऊपर जाने में काफी मुश्किल होगी। इस विषय में कुलपति प्रो. संजय तिवारी का कहना है कि इसे चेक करवाया जाएगा, ऐसा क्यों हुआ। प्रशासनिक भवन में पार्किंग की ओर से लिफ्ट की व्यवस्था है, जहां से दिव्यांग विद्यार्थी आसानी से फर्स्ट फ्लोर आ सकते हैं।

ये विश्वविद्यालय की नई बिल्डिंग है। जिसके निर्माण कार्य में लापरवाही सामने आई है
48 साल पुराने भवन में चल रहा प्रशासनिक काम
दुर्ग विश्वविद्यालय का संचालन पुराने महिला कॉलेज के भवन से हो रहा है। यह भवन 48 साल से भी ज्यादा है। यहां कई बार छत का हिस्सा गिर चुका है। कई बार बड़ा हादसा होते-होते बचा है।
यहां उत्तर पुस्तिका और अन्य सामग्री रखने में भी काफी परेशानी होती है। बावजूद इसके नए भवन में शिफ्ट होने को लेकर न तो विश्वविद्यालय प्रबंधन जल्दी कर रहा है और न ही पीडब्ल्यूडी ही आगे ध्यान दे रहा है।
पोटियाकला में बना दुर्ग विश्वविद्यालय का नया भवन
- 40 एकड़ जमीन में फैला है पूरा विवि का एरिया
- 10 एकड़ जमीन में विश्वविद्यालय की प्रशासकीय बिल्डिंग बनाई गई है।
- 14.92 करोड़ की लागत से किया गया है निर्माण।
- 5 करोड़ रुपए रोड,लिफ्ट, ड्रेनेज, लैंड स्कैप व अन्य सौंदर्यीकरण के लिए मिले।
- 8 मार्च 2019 को इसके निर्माण को लेकर भूमिपूजन किया गया था।
- 2021 में निर्माण कार्य को पूर्ण करना था।
- 2023 में रूसा ने नोटिस जारी कर कार्य में हुई लेटलतीफी पर एजेंसी को नोटिस भेजा था।
- 2024 में भवन का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ।
फंड को लेकर हो चुका है विवाद
2023 में फंड की कमी को लेकर विवि प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार समेत राष्ट्रीय उच्चत्तर शिक्षा अभियान (रूसा) के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हुई थी। इसकी शिकायत भी हुई थी। इसके बाद ठेकेदार को नोटिस भी जारी किया गया था। बाद में 2024 में भवन का निर्माण पूर्ण हुआ।
लेकिन अभी से ही दीवारों में सीपेज, टूट-फूट और टाइल्स की क्वालिटी को लेकर प्रबंधन ने नाराजगी जताते हुए इसे जल्द सुधारने पत्र लिखा है। अब ऐसे में न तो बिल्डिंग में सुधार कार्य हो रहे हैं और न ही इसमें शिफ्ट हो रहे हैं। ऐसे में बिल्डिंग निर्माण पूर्ण होने के बाद यह बंद पड़ा हुआ है।
निर्माण के एक साल बाद भी नहीं हो सका हैंडओवर
पोटियाकला में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन बनाने का काम पूर्ण हो चुका है। यह कार्य पूर्ण हुए लगभग एक साल हो गया है। इसमें 14.92 करोड़ रुपए खर्च किया गया है। मार्च 2019 में काम शुरू हुआ है। 5 अप्रैल 2021 तक इसे पूरा होना था, लेकिन कोविड की वजह से यह कार्य तय समय पर पूर्ण नहीं हो सका।
कार्य में लेटलतीफी बरती गई। 2024 में प्रशासनिक भवन का निर्माण पूर्ण हुआ। लेकिन एक साल से यहां पर अब तक विश्वविद्यालय शिफ्ट नहीं हो सका है। इसकी वजह अब बिल्डिंग निर्माण में की गई खानापूर्ति बताई जा रही है।