Farming on 10 acres through rain pipe-drip irrigation system | रेन पाइप-ड्रिप इरिगेशन सिस्टम के जरिए 10 एकड़ में खेती: चकरी पद्धति से उगाया ड्रैगन फ्रूट, इससे पौधे सुरक्षित रहते, 15 साल तक फल देते हैं – Chhattisgarh News

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September 22, 2025



परम्परागत रूप से केवल धान की खेती पर निर्भर रहने के बजाय एक किसान ने अपने हौसले से राजनांदगांव जिले में नई कहानी लिख दी है। डोंगरगांव ब्लॉक के मचानपार के किसान शैलेष परमार ने पहले जमीन को अनुकूल बनाया, फिर चकरी पद्धति से ड्रैगन फ्रूट उगाए। जब 10 एकड़

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किसान परमार ने बताया, राजनांदगांव जिले के अधिकांश किसान साल में एक बार धान की फसल, गेहूं की फसल और सामान्य सब्जियां ही बोते हैं। मैं भी अपने 50 एकड़ खेत में धान ही उगाता था। इससे काम तो चल रहा था लेकिन ज्यादा फायदा नहीं हो रहा था। ऐसे में कुछ नया करने का संकल्प किया।

शैलेष परमार ने बताया कि मैंने ड्रैगन फ्रूट की खेती के बारे में जानकारी जुटाई। फिर खेत को उपजाऊ और ड्रैगन फ्रूट की फसल के अनुकूल बनाने के लिए जुताई कर कुछ दिन धूप के लिए छोड़ दिया। इसके बाद जैविक खाद डाला। खेत के 10 एकड़ हिस्से में चकरी पद्धति से कमलम किस्म के ड्रैगन फ्रूट की बुवाई की।

जिले में मैं पहला किसान हूं, जिसने इस पद्धति से यह बुवाई की। साथ ही रेन पाइप और ड्रिप पाइप इरिगेशन सिस्टम से खेती को जोड़ा। पौधों को सुरक्षित बनाने के लिए सीमेंट से गोल आकार के चकरी युक्त स्टैंड बनाए। इस पद्धति की खासियत है कि घेराबंदी में सभी पेड़ सुरक्षित रहते हैं। पेड़ों को सीमेंट के स्टैंड से रस्सी के माध्यम से बांधकर रखा जाता है।

इससे पेड़ इस स्टैंड के चारों ओर फैलकर फल देता है। खेत के कुछ हिस्से में विभिन्न प्रकार की देसी सब्जियां भी लगाई, जिससे साल में अतिरिक्त कमाई होने लगी। पहले साल में ही मेरा प्रयास सफल रहा और जब 10 एकड़ में हजारों पेड़ों पर ड्रैगन फ्रूट महकने लगे तो उन्हें देखने के लिए क्षेत्र के लोगों का तांता लग गया।

किसान परमार ने बताया, कमलम किस्म का ड्रैगन फ्रूट गुलाबी और कांटेदार होता है। एक पेड़ लगभग 10 से 15 वर्ष तक जीवित रहकर गुलाबी फल देता है। हालांकि ड्रैगन फ्रूट की खेती में मेहनत और देखभाल करने की अधिक जरूरत होती है। पेड़ अंकुरित होते ही कांटेदार होता है।

यह धीरे-धीरे बढ़ते हुए 5 से 10 फीट का हो जाता है। फार्म हाउस में ड्रैगन फ्रूट 100 रुपए किलो में बिकता है जबकि बाजार में इसके दाम 150 से 200 रुपए तक मिल जाते हैं। इस फल की छत्तीसगढ़ में अच्छी डिमांड रहती है इसलिए यह हाथों हाथ बिक जाता है।

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