Gangrel, Gidhwa Parsada and Mandhar will be made Ramsar sites | छत्तीसगढ़ में पहली बार: गंगरेल, गिधवा परसदा और मांढर को बनाएंगे रामसर साइट – Raipur News

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September 16, 2025



राज्य के छह जलाशय चुने गए, अब उन्हें किया जाएगा डेवलप, सर्वे के जरिये ये देखा जाएगा कि इन वेटलैंड में कितने किस्म के और कहां कहां से आते हैं पक्षी

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राजधानी से करीब 22 किमी दूर मांढर जलाशय को रामसर साइट के तौर पर विकसित करने चुना गया है। इसके अलावा गंगरेल, कोपरा जलाशय, गिधवा परसदा, कुरंदी और नीमगांव जलाशय को भी रामसर साइट के लिए चिन्हिंत किया गया है। अब यहां सर्वे के जरिये ये देखा जाएगा कि इन वेटलैंड में कितने किस्म के और कहां कहां से पक्षी आते हैं? उन पक्षियों में कितने विलुप्त प्राय हैं? क्या वहां का वेटलैंड कितने समय तक पक्षियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।

सर्वे के बाद इन वेटलैंड को रामसर साइट के लिए विकसित किया जाएगा। मंगलवार को वनमंत्री केदार कश्यप की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राज्य वेटलैंड प्राधिकरण की बैठक नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन में हुई। बैठक में वन मंत्री कश्यप ने राज्य के सभी जिलों की जिला वेटलैंड संरक्षण समितियों को अपने-अपने क्षेत्रों में वेटलैंड के संरक्षण और संवर्धन हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही अन्य राज्यों में वेटलैंड प्राधिकरण के सदस्य सचिवों के वित्तीय अधिकारों का अध्ययन कर संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजने के भी निर्देश दिए। छत्तीसगढ़ राज्य में वेटलैंड संरक्षण और प्रबंधन को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से राज्य वेटलैंड प्राधिकरण की तीसरी बैठक का आयोजन किया गया।

बैठक में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव, राज्य लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक अनिल साहू, सचिव वन अमरनाथ प्रसाद, आवास एवं पर्यावरण, जल संसाधन, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, मत्स्य विभाग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इसी बैठक में राज्य में रामसर स्थलों की पहचान को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में अपर मुख्य सचिव वन ऋचा शर्मा ने वेटलैंड प्राधिकरण द्वारा दो माह के भीतर समस्त कार्य से संबंधित डाटा राज्य की वेबसाइट में पब्लिश करने के निर्देश दिए।

अपर मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर 15 दिवस के भीतर जिला वेटलैंड संरक्षण समिति द्वारा वेटलैंड के ग्राउण्डट्रूथिंग एवं डिमार्केशन संबंधी कार्य पूर्ण कर प्राधिकरण को प्रेषित करने के निर्देश दिए।

क्या है रामसर साइट

रामसर स्थल उन स्थलों को कहते हैं जो अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों यानी जलाशय की सूची में हैं। रामसर साइट में उन जलाशयों या आर्दभूमि को शामिल किया जाता है जहां न्यूनतम 20 हजार से ज्यादा पक्षी आते हैं। इनमें कई दुलर्भ किस्म के देशी-विदेशी पक्षी होते हैं।

उन पक्षियों के लिए वहां सुरक्षा और भोजन की उपलब्धता होती है। रामसर साइट घोषित होने के बाद उस स्थान पर ऐसे कोई भवन, प्रोजेक्ट या निर्माण नहीं किया जा सकता जिससे कि पक्षियों और जलाशय के जीवों को किसी तरह की परेशानी हो। यानी उस स्थान के चारों ओर एक निर्धारित दायरे में अंतर्राष्ट्रीय पाबंदी लग जाती है। छत्तीसगढ़ में फिलहाल एक भी रामसर साइट नहीं है। भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या 91 है।

जनकल्याणकारी निर्णय से वन वासियों की आय बढ़ेगी: कश्यप वनोपज राजकीय व्यापार अन्तर्विभागीय समिति(आईडीसी) की 309वीं बैठक में वन मंत्री कश्यप ने कहा कि जनकल्याणकारी निर्णयों से वनवासियों की आय में बढ़ोत्तरी होगी। बैठक में वर्ष 2023-24 तथा 2024-25 के लिए भारत सरकार की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) योजना के अंतर्गत 16 प्रमुख वनोपजों – तेंदूपत्ता, ईमली (बीज रहित), महुआ फूल, गोंद, हर्रा, बहेरा, चिरौंजी, कोदो, कुल्थी, रागी, गिलोय, कुसुम बीज, बहेड़ा बीज, जामुन पल आदि वनोपजों का विक्रय मूल्य पर खरीदी के प्रस्ताव को समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।



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