Head constable’s advocacy dispute, lawyer sends notice to advocate association president | हेडकांस्टेबल का पैरवी विवाद,वकील ने अधिवक्ता-संघ अध्यक्ष को भेजा नोटिस: वरिष्ठ अधिवक्ता से हुई थी मारपीट, पैरवी करने वाले वकील को अध्यक्ष ने दिया था नोटिस – Ambikapur (Surguja) News

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December 2, 2025



अंबिकापुर में वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश तिवारी और प्रधान आरक्षक संतोष कश्यप के बीच मारपीट के मामले में जिला अधिवक्ता संघ सरगुजा ने प्रधान आरक्षक के पक्ष में पैरवी नहीं करने का प्रस्ताव पास किया था। मामले में संतोष कश्यप के पक्ष में पैरवी करने वाले वकील अ

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दरअसल, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश तिवारी के बेटे राहुल तिवारी के साथ गाड़ी बैक करने के दौरान प्रधान आरक्षक संतोष कश्यप के साथ विवाद हो गया एवं मारपीट हो गई। इस दौरान बीच-बचाव करने पहुंचे अधिवक्ता राजेश तिवारी के साथ भी संतोष कश्यप एवं साथियों ने हमला कर दिया था। मारपीट में राजेश तिवारी को भी चोटें आई थीं।

अधिवक्ता संघ ने कहा-पैरवी नहीं करेंगे मामले में अधिवक्ता राजेश तिवारी की रिपोर्ट पर गांधीनगर पुलिस ने प्रधान आरक्षक संतोष कश्यप एवं अन्य के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। मामले में अधिवक्ता संघ एवं ब्राहम्ण समाज ने कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। संतोष कश्यप का आरोप है कि उसकी रिपोर्ट थाने में नहीं लिखी गई।

अधिवक्ता संघ ने मामले में निर्णय लिया था कि संघ का कोई सदस्य प्रधान आरक्षक संतोष कश्यप की पैरवी नहीं करेगा। वहीं अधिवक्ता अरूण वर्मा ने प्रधान आरक्षक संतोष कश्यप की पैरवी के लिए वकालतनामा कोर्ट में पेश किया तो अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष ने अरूण वर्मा को कारण बताओ नोटिस भेज दिया।

नोटिस के जवाब में अधिवक्ता ने भेजा नोटिस अधिवक्ता संघ अध्यक्ष ने अपने नोटिस में संघ के निर्णय का उल्लेख करते हुए अरूण वर्मा से पूछा था कि क्यों न आपको संघ की सदस्यता से बाहर कर दिया जाएगा।

इस नोटिस के जवाब में अरुण वर्मा ने उल्टे अधिवक्ता संघ अध्यक्ष को नोटिस भेज दिया है। नोटिस में अरुण वर्मा ने कहा है कि अधिवक्ता संघ को इस तरह का प्रस्ताव पारित करने का अधिकार भी नहीं है क्योंकि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार किसी अधिवक्ता को किसी पक्षकार की पैरवी से रोका नहीं जा सकता।

अरुण वर्मा ने कहा कि संघ का यह कदम अधिवक्ता के अधिकार और भारतीय संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है। उन्होंने नोटिस को निरस्त करने कहते हुए जवाब में लिखा है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे उच्च न्यायालय में वैधानिक कार्रवाई करेंगे।

अधिवक्ता अरुण वर्मा ने जवाब में उच्चतम न्यायालय के 12 फरवरी 2024 के एक फैसले का भी उल्लेख किया है, जिसमें कहा गया है कि किसी अधिवक्ता को किसी पक्षकार की पैरवी करने से नहीं रोका जा सकता और किसी अधिवक्ता संघ के पास ऐसे प्रस्ताव पारित करने का अधिकार नहीं है।



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