Madvi Hidma Encounter Controversy; Soni Sodhi | Bastar News | सोनी सोढ़ी बोलीं-एनकाउंटर फर्जी, हिड़मा की हत्या हुई: पूवर्ती में कहा- देवजी पकड़ा गया तो हिड़मा क्यों नहीं, ये दूसरा गुंडाधुर, कोर्ट जाएंगे – Chhattisgarh News

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November 21, 2025


पूवर्ती में गुरुवार को हिड़मा के शव यात्रा के दौरान सोनी सोढ़ी ने एनकाउंटर पर सवाल उठाए।

बस्तर की सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी ने नक्सली लीडर माड़वी हिड़मा के एनकाउंटर पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह फर्जी एनकाउंटर था। हिड़मा समेत 6 लोगों को पकड़कर मारा गया, जिसे सोनी ने हत्या करार दिया।

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सोनी ने कहा कि वे कोर्ट जाएंगी और जांच कमेटी बिठाएंगे। उन्होंने हिड़मा को बस्तर का दूसरा गुंडाधुर बताया और सवाल उठाया कि अगर देवजी की गिरफ्तारी हो सकती है, तो हिड़मा को क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया।

दरअसल, छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सितारामा राजू जिले में 18 नवंबर को हिड़मा और उसकी पत्नी राजे समेत 6 नक्सलियों का एनकाउंटर हुआ था।

इसके बाद 20 नवंबर को सुकमा जिले के पूवर्ती गांव में हिड़मा और उसकी पत्नी का अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर सोनी सोढ़ी समेत सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे। इस दौरान सोनी सोढ़ी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की.. पढ़िए सीधी बात:-

तस्वीर हिड़मा के अंतिम संस्कार से पहले की है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी ने हिड़मा के शव पर काले शर्ट-पैंट रखे थे।

तस्वीर हिड़मा के अंतिम संस्कार से पहले की है। सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोढ़ी ने हिड़मा के शव पर काले शर्ट-पैंट रखे थे।

सवाल- हिड़मा का एनकाउंटर हुआ है। आप क्या कहना चाहेंगी?

जवाब – ये एनकाउंटर नहीं है, फर्जी मुठभेड़ है। हिड़मा की हत्या की गई है। उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जा सकता था। वो एक आदिवासी था इसलिए उसे मार दिया गया। हमारी आदिवासी संस्कृति में 12 बजे अंतिम संस्कार नहीं होता। 4 बजे करते हैं। हम पर पुलिस ने दबाव बनाया है।

सवाल – आपने शव पर काले रंग के कपड़े डाले, उसका क्या अर्थ था?

जवाब – हिड़मा एक क्रांतिकारी था। बस्तर के लिए लड़ा है। बस्तर में हमेशा उसकी आवाज बने रहेगी। ये क्रांति तब तक रहेगी, जब तक आदिवासियों पर जुल्म खत्म नहीं होता। गुंडाधुर ने तीर के साथ लड़ाई लड़ी थी। हिड़मा ने बंदूक की नोक से लड़ाई लड़ी है। मेरा हिड़मा भाई दूसरा गुंडाधुर है।

अंतिम संस्कार से पहले हिड़मा की पत्नी राजे के शव पर लाल जोड़ा रखा गया था।

अंतिम संस्कार से पहले हिड़मा की पत्नी राजे के शव पर लाल जोड़ा रखा गया था।

सवाल – इस एनकाउंटर को लेकर अब आप लोग आगे क्या करेंगे?

जवाब – हिड़मा की हत्या पर हम कोर्ट जाएंगे। केस फाइल करेंगे। जांच कमेटी बिठाएंगे। क्योंकि हिड़मा की हत्या हुई है। बाकी लोगों को पकड़कर हिरासत में रखा गया है, तो हिड़मा को क्यों नहीं पकड़कर जेल भेजा गया? लेकिन एक आदिवासी को बड़ा लीडर बनते सरकार देख नहीं पाई। इसलिए उसकी हत्या करवा दी गई।

सोनी सोढ़ी हिड़मा के शव से लिपटकर रोई थी।

सोनी सोढ़ी हिड़मा के शव से लिपटकर रोई थी।

सवाल – देवजी की गिरफ्तारी की खबर आ रही है। आप लोगों के पास क्या जानकारी है?

जवाब – हमें भी जानकारी मिली है कि देवजी की गिरफ्तारी हो गई है। अगर देवजी की गिरफ्तारी हो गई है तो हिड़मा की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? इसलिए क्योंकि वो आदिवासी था। इसलिए इसे कुचलकर मारना था। मैं बंदूक की लड़ाई का समर्थन नहीं करती हूं।

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो हिड़मा 3 लेयर सुरक्षा में रहता था। अब इतना बड़ा कैडर होने के बाद सिर्फ 6 लोगों का एनकाउंटर कैसे हुआ? इससे साफ हो रहा है कि यह सीधी तौर पर हत्या है।

हिड़मा और उसकी पत्नी राजे का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया था।

हिड़मा और उसकी पत्नी राजे का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया था।

अब जानिए हिड़मा के एनकाउंटर की कहानी

दरअसल, 18 नवंबर को माड़वी हिड़मा छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर मारा गया। ये नक्सल संगठन में सेंट्रल कमेटी का सदस्य था। इस पर 1 करोड़ रुपए का इनाम घोषित था। छ्त्तीसगढ़ में नक्सल संगठन का फ्रंट लाइन का लीडर था। घर में इसकी मां इसे देवा नाम से पुकारती थी।

26 से ज्यादा बड़े हमले का मास्टरमाइंड और करीब 300 से ज्यादा जवानों और आम नागरिकों की हत्या का जिम्मेदार था। वर्तमान में अपने करीब 160 से 170 साथियों के साथ जंगल में घूमता था। 8 से 10 महीने पहले कर्रेगुट्टा के जंगल और पहाड़ पर हिड़मा का ठिकाना हुआ करता था।

कर्रेगुट्टा के जंगलों में फोर्स के ऑपरेशन के बाद ये पहले छत्तीसगढ़ से तेलंगाना भागा, फिर वहां से आंध्र प्रदेश आया। जंगल में छिपा हुआ था। इसी बीच इंटेलिजेंस की पुख्ता इनपुट के बाद जवानों ने हिड़मा और इसकी पत्नी राजे समेत 6 नक्सलियों का एनकाउंटर कर दिया।

अब जानिए देवा से खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा बनने की कहानी

माड़वी हिड़मा सुकमा जिले के पूवर्ती गांव में जन्मा। हिड़मा की उम्र अभी करीब 50 साल थी। हाइट 5.5 फीट थी। ये बचपन से ही फुर्तीला और तेज दिमाग का था। प्राइमरी स्कूल में पढ़ाई की। करीब 15-16 साल का था, तब नक्सली इसे अपने साथ लेकर चले गए थे। नक्सल संगठन में ‘बाल संघम’ में शामिल किया।

नक्सलियों की जनताना स्कूल में इसने पढ़ाई की। यहीं पहली बार हथियार पकड़ा। हिड़मा के फुर्तीले शरीर को देखते हुए नक्सलियों ने अपने LOS (लोकल ऑब्जर्वेशन स्क्वायर्ड) ग्रुप में शामिल किया। हिड़मा की रची गई साजिश में नक्सलियों को कई बड़ी सफलताएं मिली।

कोंटा एरिया कमेटी का बनाया गया था कमांडर

हिड़मा पहले नारायणपुर, बीजापुर, गढ़चिरौली में कई साल तक एक्टिव रहा, फिर बड़े लीडरों ने इसे कोंटा एरिया कमेटी के जॉइंट प्लाटून का कमांडर बनाकर भेजा। ये यहां मिनपा, टेकलगुडेम, बुरकापाल जैसे इलाकों में लगातार मूवमेंट करता रहा।

हिड़मा ने नक्सल संगठन को लगातार सफलताएं दी थीं। प्लाटून कमांडर, कंपनी कमांडर भी था। वहीं नक्सलियों ने इसे मिलिट्री बटालियन नंबर-1 का कमांडर और DKSZCM (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर) बनाया।

नक्सलियों की इस बटालियन में लगभग 300 से 400 नक्सली थे। जिसकी कमांड हिड़मा के हाथों में थी। 2006-7 से लेकर 2022 तक बस्तर में हुई सभी बड़ी घटनाओं का हिड़मा ही मास्टरमाइंड था। करीब डेढ़ साल पहले ही इसे सेंट्रल कमेटी में शामिल किया गया था।

सलवा जुडूम के समय संगठन में कमाया बड़ा नाम

साल 2001 से 2005-6 के बीच बस्तर में सलवा जुडूम का दौर चल रहा था। आदिवासी नक्सलियों के खिलाफ ही खड़े हो रहे थे। तब नक्सलियों ने कई गांवों को बंदूक के बल पर खाली करवा दिया था। हत्या, लूट, आगजनी जैसी वारदातें हिड़मा करता था।

2006 में एर्राबोर के राहत शिविर कैंप को आग लगाने के बाद आंध्र और तेलंगाना के बड़े लीडर्स की ज्यादातर नजर इसपर होती थी। इसके बाद 2008-9 में इसे बटालियन का कमांडर इन चीफ बनाया गया था। कमांडर बनने के बाद इसने बस्तर में नरसंहार शुरू किया था। सैकड़ों हत्याएं की। पीछे पलटकर नहीं देखा।

25-31 लोगों को जिंदा जलाकर मार डाला था हिड़मा

16-17 जुलाई 2006 में हिड़मा के नेतृत्व में नक्सलियों ने सुकमा जिले के एर्राबोर राहत शिविर कैंप को आग के हवाले कर दिया था। इस वारदात में करीब 25 से 31 लोग जिंदा जल गए थे, जबकि 20 लोग घायल हुए थे। जिंदा जलाकर मार डालने से ग्रामीण दहशत में थे।

वहीं 21 अप्रैल 2012 को सुकमा कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन (IAS) का अपहरण करने का ये मास्टरमाइंड था। एलेक्स पॉल मेनन को नक्सलियों ने किडनैप कर लिया था। लोगों को लग रहा था कि कलेक्टर को हिड़मा मार डालेगा, लेकिन बाद में कलेक्टर को रिहा कर दिया गया था।

झीरम घाटी हमले में हिड़मा का था हाथ

इसके साथ ही 25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला किया गया था। इस वारदात में कांग्रेस के 32 नेता और जवान शहीद हुए थे। इस वारदात में भी नक्सलियों की PLGA बटालियन नंबर-1 का हाथ होना बताया गया था। इसका कमांडर हिड़मा था।

हिड़मा के एनकाउंटर के बाद अब खात्मे की ओर नक्सलवाद

बस्तर में भले ही आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के नक्सलियों ने अपना वर्चस्व कायम रखा था, लेकिन माड़वी हिड़मा ही बस्तर में नक्सलवाद को जिंदा रखने की एक कड़ी था। इसी के इशारे पर बस्तर में सैकड़ों आदिवासी युवक-युवती और बच्चे (12 से 15 साल) नक्सल संगठन में शामिल हुए थे।

हिड़मा के इशारे पर ही युवक-युवती और बच्चे काम करते थे। अब हिड़मा के एनकाउंटर के बाद बस्तर में नक्सल मिलिट्री खात्मे की ओर है। कहा जा रहा है कि जो नक्सली जंगलों में बचे हैं, वह अब तेजी सरेंडर कर सकते हैं।



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