मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में शारदीय नवरात्रि पर माता की आराधना की जा रही है। धार्मिक नगरी मनेंद्रगढ़ में पैंतीस से अधिक पंडालों में मातारानी की स्थापना की गई है, जहां श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
.
इनमें एक पंडाल ऐसा है जहां पिछले 82 सालों से मां दुर्गा विराजित हैं और इसकी स्थापना देश की आजादी से पहले 1942 में हुई थी। शहर में सबसे पहले मातारानी की प्रतिमा रेलवे इंस्टीट्यूट के परिसर में स्थापित की गई थी।

आजादी के पहले से चली आ रही परंपरा
यह परंपरा 1942 से लगातार चली आ रही है। इस पंडाल में बंगाली पद्धति से पूजा की जाती है, जो इसकी एक प्रमुख विशेषता है।
जब यहां पूजा शुरू हुई थी, तब पश्चिम बंगाल से ट्रेन की एक मालवाहक बोगी में मातारानी की प्रतिमा लाई जाती थी। यह प्रक्रिया कई सालों तक जारी रही, जिसने इस पंडाल को एक खास पहचान दी।

आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी पहुंचते है श्रद्धालु
शहर के अन्य पंडालों में सप्तमी, अष्टमी और नवमी की पूजा होती है। इन तीन दिनों में मनेंद्रगढ़ में मेले जैसा माहौल रहता है, जहां शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
जिला मुख्यालय के पंडालों में विशाल भंडारे का आयोजन होता है, जिससे दर्शनार्थियों को भोजन की सुविधा मिलती है।