दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश ने दुर्ग से रायपुर के बीच रेलवे ट्रैक का निरीक्षण किया है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मिडिल लाइन पर 130 किमी प्रति घंटा की स्पीड से ट्रेन चलाए जाने वाले ट्रैक का जायजा लिया। ट्रैक के रेडी होने के बाद
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वहीं जीएम प्रकाश ने बताया कि नॉन इंटरलॉकिंग के दौरान रद्द हो रही ट्रेनों को लेकर प्लानिंग चल रही है। रेलवे ने फैसला किया है कि अब नॉन इंटरलॉकिंग के दौरान सप्ताह या दस दिन पहले ट्रेन कैंसिल नहीं की जाएगी। ट्रेनों को नॉन इंटरलॉकिंग की प्लानिंग फाइनल होने के बाद रद्द करेगा। जिससे यात्री अपनी टिकट रद्द कर दूसरी ट्रेन में टिकट कर अपनी यात्रा कर सके।

निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों को निर्देश देते हुए महाप्रबंधक तरुण प्रकाश।
नॉन इंटरलॉकिंग के चलते 6 लाख यात्री हुए परेशान
देशभर में तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के निर्माण कार्य के चलते जनवरी से मार्च 2025 के बीच रेलवे ने कुल 805 ट्रेनों को रद्द किया। इनमें 227 एक्सप्रेस और 578 लोकल ट्रेनें शामिल हैं। इसके चलते लगभग 6 लाख यात्रियों को यात्रा में कठिनाई झेलनी पड़ी। रेलवे का कहना है कि यह कैंसिलेशन नॉन-इंटरलॉकिंग वर्क की वजह से हुआ।
रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, केवल एक्सप्रेस ट्रेनों की कैंसिलेशन से करीब 2 लाख 66 हजार और लोकल ट्रेनों से करीब 3 लाख 66 हजार यात्री प्रभावित हुए। इन यात्रियों में से लगभग 800 यात्रियों को यात्रा कैंसिल करनी पड़ी, जबकि 12 जोन की कुल 844 ट्रेनों को रद्द किया गया।
LHB कोच वाली ट्रेनों की गति में होगा इजाफा निरीक्षण के बाद जीएम तरुण प्रकाश ने बताया, “वंदे भारत के अलावा LHB कोच वाली ट्रेनों की गति में भी इजाफा किया जा रहा है। ट्रैक और उनकी संरचना को हाई स्पीड के अनुरूप बनाया जा रहा है।” उन्होंने आगे बताया कि अब ट्रेनों का संचालन सुरक्षित, सुगम और तेज गति से किया जा सकेगा।
जानिए क्या है LHB कोच
LHB का पूरा नाम लिंके-हॉफमैन बुश है। यह जर्मन तकनीक पर आधारित आधुनिक ट्रेन कोच हैं, जिन्हें भारतीय रेलवे ने पुराने ICF यानी इंटीग्रल कोच फैक्ट्री की जगह इस्तेमाल करना शुरू किया है। ये 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। जबकि ICF मैक्स 110 से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार ही पकड़ सकता है।
एलएचबी कोच की खासियत
| तकनीक | जर्मन टेक्नोलॉजी से तैयार |
| सुरक्षा | ये कोच एंटी-टेलिस्कोपिक होते हैं — दुर्घटना में एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते |
| गति | 160 किमी/घंटा तक की स्पीड सहने में सक्षम |
| आवाज | कम कंपन और शोर |
| आराम | बेहतर सस्पेंशन से आराम दायक सफर |
| पावर सप्लाई | सेंट्रली पावर सप्लाई (ईओजी सिस्टम) से लैस |
| फायर सेफ्टी | आग प्रतिरोधक सामग्री से बने होते हैं |
| आधुनिक सुविधा | बायो-टॉयलेट्स, ब्रेकिंग सिस्टम बेहतर |
छत्तीसगढ़ के रूट पर LHB कोच वाली ट्रेनें
- बेतवा(18203/18204) – दौर्ग से कानपुर तक, बी।Tier‑II, III, Sleeper और जनरल क्लास सहित पूरी तरह से LHB रैक में चलती है।
- अमरकंटक सुपरफास्ट एक्सप्रेस (12853/12854) – दैनिक सुपरफास्ट ट्रेन, दौर्ग–भोपाल मार्ग पर 22 LHB कोच के साथ चलती है
- छत्तीसगढ़ संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12823/12824) – दौर्ग–दिल्ली रूट, 2017 से LHB कोच में चल रही है ।
- बिलासपुर–बीकानेर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (20845/20846) – बिलासपुर से बीकानेर तक, 22 LHB कोच के साथ सेवा में है।
- तिरूनेलवेली–बिलासपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस (22619/22620) – दक्षिण-भारत से बिलासपुर तक, पूरी तरह LHB में परिवर्तित है ।
- हसदेव एक्सप्रेस (18249/18250) – कोरबा–रायपुर के बीच, एक रैक LHB कोच में चलती है।
ये सभी ट्रेनें दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे (SECR) क्षेत्र से होकर गुजरती हैं, जिसमें बिलासपुर और दुर्ग मुख्य डिवीजन हैं। फेब्रिकेशन से लेकर रिट्रोफिट तक की प्रक्रिया में इस जोन में 16–20 ट्रेनों को LHB कोच के साथ अपडेट किया जा चुका है, जिससे यात्रियों को अधिक सीटें और बेहतर सुविधा मिल रही है
वंदे भारत, LHB और ICF की कोच मैक्स स्पीड
| ICF | 110 किमी/घं |
| LHB | 160 किमी/घं |
| वंदे भारत | 180–200 किमी/घंटे (डिजाइन), 160 अधिकृत |
स्टेशनों के रि डेवलेपमेंट का भी लिया जायजा
महाप्रबंधक ने दुर्ग कोचिंग डिपो, मेंटेनेंस लाइन, रेलवे कॉलोनी, रिटायरिंग रूम और विस्तारित सर्कुलेटिंग एरिया का निरीक्षण किया। इसके साथ ही अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चल रहे रि-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट, यात्री प्रतीक्षालय, पेयजल सुविधा, स्वच्छता और सुरक्षा की समीक्षा की।