Operation Cyber Shield… Accused who supplied SIM cards to cyber thugs arrested | ऑपरेशन साइबर शील्ड…साइबर ठगों को सिम देने वाला आरोपी गिरफ्तार: ‘डबल थंब स्कैन’-आई ब्लिंक से एक्टिवेट करता था फर्जी सिम, एमपी के आरोपी को साइबर टीम ने गोवा से पकड़ा – Raipur News

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December 21, 2025


राजधानी रायपुर की पुलिस ने ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत साइबर अपराधियों की रीढ़ माने जाने वाले फर्जी सिम कार्ड सप्लायरों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।

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रायपुर रेंज आईजी अमरेश मिश्रा के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में मध्य प्रदेश के मैहर निवासी एक आरोपी को गोवा से गिरफ्तार किया गया है, जो ग्राहकों की पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी सिम एक्टिवेट करता था और उन्हें देशभर के साइबर ठगों को बेच देता था।

आरोपी के बारे में जानकारी देते हुए रायपुर पुलिस के अधिकारी।

आरोपी के बारे में जानकारी देते हुए रायपुर पुलिस के अधिकारी।

गोवा से पकड़ा गया जालसाज

सिविल लाइन थाना रायपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 290/25 की जांच के दौरान रेंज साइबर थाना की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी रामकृष्ण कुशवाहा को चिन्हित किया। आरोपी मूल रूप से मैहर (मध्य प्रदेश) का निवासी है, लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए गोवा के संगोल्दा क्षेत्र (प्राइम रोज) में छिपकर रह रहा था। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

18.52 लाख की ठगी, 41 फर्जी सिम शामिल

जांच में सामने आया कि छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों के पीड़ितों से की गई 18.52 लाख रुपए की ठगी में कुल 41 फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल हुआ। आरोपी ‘शिवम मोबाइल’ और ‘रामकृष्ण मोबाइल’ के नाम से प्वाइंट ऑफ सेल (POS) संचालित करता था। उसके पास से बड़ी संख्या में प्री-एक्टिवेटेड (पहले से चालू) सिम बरामद किए गए हैं।

आने वाले दिनों में होगी और गिरफ्तारी

पुलिस के मुताबिक, ये सिम आगे साइबर ठगों को सप्लाई किए जाते थे, जिनका उपयोग बैंकिंग फ्रॉड, ओटीपी ठगी और ऑनलाइन स्कैम में होता था। आरोपी से नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

ऐसे करता था ‘डबल थंब स्कैन’ से ठगी

  • ई-केवाईसी (E-KYC): नया सिम या पोर्ट कराने आए ग्राहकों से ‘डबल थंब स्कैन’ या ‘आई ब्लिंक’ के जरिए एक की जगह दो सिम एक्टिवेट कर लेता था।
  • डी-केवाईसी (D-KYC): जिन ग्राहकों के पास आधार की फिजिकल कॉपी होती थी, उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर खुद ही विवरण वेरिफाई करता और फर्जी सिम निकाल लेता था।



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