Paddy grown using vermi-matrix grid method, yield up to 106 quintals per hectare | वर्मी मैट्रिक्स ग्रिड मेथड से उगाया धान, प्रति हेक्टेयर 106 क्विंटल तक पैदावार – Raipur News

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August 11, 2025



कोरबा जिला मुख्यालय से लगे झगरहा के किसान रामरतन निकुंज (67) ने धान की खेती करने वाले किसानों को नई राह दिखाई है। वर्मी मैट्रिक्स ग्रिड पद्धति अपनाते हुए धान की खेती में लागत 50 प्रतिशत तक घटाते हुए प्रति हेक्टेयर 95 से 106 क्विंटल तक पैदावार ले रहे

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रामरतन ने बताया, 2018 में एसईसीएल गेवरा से रिटायर होने के बाद खेती में नया करने की सोची। धान की खेती की पद्धतियों का अध्ययन किया। पता पता चला कि औसत पैदावार 50 से 80 क्विंटल ही हो रही है। फिर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संजय पटेल से सलाह ली। बिलासपुर, रायपुर में कृषि मेलों में गया। आखिर 3 साल पहले वर्मी मैट्रिक्स ग्रिड पद्धति अपनाई और 2 हेक्टेयर में धान की फसल बोयी।

इस पद्धति का पहली बार प्रयोग मैंने ही किया, इसलिए चुनौती भी थी। यह समय प्रबंधन आधारित खेती है। जिस तरह सब्जी की फसल लगाते हैं, उसी तरह वर्मी कंपोस्ट को कतारबद्ध डालकर धान के पौधों की रोपाई की। धान की नर्सरी 15 से 20 दिन से अधिक की नहीं होनी चाहिए। वर्मी कंपोस्ट से पौधे को ग्रोथ मिली, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी। कीट-व्याधि का प्रकोप कम हुआ।

रासायनिक कीटनाशक का उपयोग कम हो गया। इससे लागत 50% तक कम हो गई। हालांकि धान लगाते समय थोड़ी मेहनत करनी पड़ी। लेकिन यह मेहनत रंग लाई और जब धान की कटाई और मिजाई हुई तो पैदावार अच्छी निकली। शुरुआत में एक हेक्टेयर में 88 क्विंटल धान की पैदावार हुई। सबसे अधिक 106 क्विंटल धान वर्ष 2023 में हुआ। जिले भर से ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी इसे देखने मेरे खेत पर आए।

रामरतन ने बताया कि अब आसपास के गांव दादर, खरमोरा, बरबसपुर आदि के किसान भी इस पद्धति को अपना रहे हैं। पांच एकड़ की खेती में करीब 1 लाख रुपए लागत आती है। जबकि सरकारी रेट के हिसाब से धान की पैदावार 6.20 लाख रुपए तक हो रही है। धान के साथ सब्जी की फसल ले रहा हूं। आम, बेर और चीकू का बगीचा भी लगाया है। आम की अलग वैरायटी तैयार करने के लिए कलम पद्धति से पौधे तैयार कर रहा हूं।



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