कोण्डागांव जिले में धान खरीदी का कार्य 15 नवंबर शुरू हो गया। बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष और विधायक लता उसेंडी ने मुलमुला स्थित उपार्जन केंद्र से विधिवत पूजा-अर्चना कर इसका शुभारंभ किया। जिले के कुल 67 केंद्रों पर धान खरीदी की जा रही है।
.
मुलमुला केंद्र पर विधायक उसेण्डी ने धान बेचने आए किसान का पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया। उन्हें शॉल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर नुपूर राशि पन्ना भी उपस्थित थीं।
शुभारंभ अवसर पर विधायक उसेण्डी ने सभी किसानों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य आज से शुरू हो गया है। उन्होंने पारदर्शी ढंग से खरीदी सुनिश्चित करने के लिए सभी तैयारियों की जानकारी दी।
उसेण्डी ने बताया कि शासन की मंशा किसानों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाना है। इसके लिए किसान निधि योजना सहित कई योजनाएं संचालित हैं, जिनका लाभ उठाने के लिए किसानों को जागरूक रहने को कहा गया।
बता दें है कि पूरे प्रदेश में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू हुई है। जिला प्रशासन ने खरीदी केंद्रों पर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। किसानों की सुविधा के लिए शासन द्वारा ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था की गई है, जिसके तहत किसान ‘टोकन तुंहर हाथ’ मोबाइल ऐप के माध्यम से घर बैठे टोकन कटा सकते हैं।

कोंडागांव स्कूल में बच्चे कर रहे धान की खेती
कोंडागांव विकासखंड के उच्च प्राथमिक शाला पीकड़भाटा (पंचायत लेमड़ी) में छात्र, शिक्षक और पालक मिलकर धान और सब्जियों की खेती कर रहे हैं। इस वर्ष फसल की पैदावार बेहद अच्छी हुई है, जिससे स्कूल से लेकर गांव तक सभी उत्साहित हैं।
विद्यालय की अनुपयोगी भूमि को खेती के लिए इस्तेमाल किया गया है। पालक किसान हल चलाते हैं, जबकि बच्चे रोपाई और अन्य कृषि कार्यों में सहयोग करते हैं। यह पहल बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कृषि कौशल भी सिखा रही है।

धान की फसल की दी जानकारी
विद्यालय के प्रधान पाठक देवी सिंह मरकाम ने बताया कि स्कूल में पर्याप्त जमीन थी, लेकिन बारिश में पानी भरने के कारण यह अनुपयोगी हो जाती थी। उन्होंने इस जमीन को खेती के लिए उपयोग करने का निर्णय लिया, और अब यह बच्चों की पढ़ाई व खुशियों का आधार बन गई है।
संकुल समन्वयक गजाधर पांडे के अनुसार, पालक भी इस कार्य में पूरे मन से सहयोग कर रहे हैं। बच्चे यहाँ परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक तकनीक भी सीख रहे हैं। फसल से होने वाली आमदनी का उपयोग बच्चों के अध्ययन टूर, शिक्षण सामग्री खरीदने और जरूरतमंद छात्रों की सहायता के लिए किया जाता है।

छात्रों में स्वावलंबन की भावना
पिछले साल इस स्कूल ने लगभग 14,000 रुपए की धान बेचकर एक प्रिंटर खरीदा था। इस वर्ष भी फसल लहलहा रही है, और सभी के चेहरों पर प्रसन्नता झलक रही है। व्यापारी स्वयं स्कूल आकर फसल खरीदते हैं, जिससे बच्चों को उनकी मेहनत का सीधा फल मिलता है।
यह प्रयोग न केवल छात्रों में स्वावलंबन की भावना जगा रहा है, बल्कि उनमें कृषि के प्रति आत्मविश्वास और जिम्मेदारी भी बढ़ा रहा है। कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना ने इसे शिक्षकों, पालकों और छात्र-छात्राओं की अभिनव पहल बताया है और कहा कि अन्य स्कूलों को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।