PRSU प्रशासन ने RSS प्रचारक को मुख्य वक्ता बनाया:NSUI का विरोध; कुलपति के नाम की नई प्लेट बनवाई, पदनाम में लिखा- RSS कार्यकर्ता

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January 22, 2026




पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में शासकीय कार्यक्रमों के नाम पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े पदाधिकारियों को मंच दिए जाने को लेकर एनएसयूआई (NSUI) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। एनएसयूआई ने इसे विश्वविद्यालय की अकादमिक तटस्थता और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। एनएसयूआई के प्रभारी महामंत्री हेमंत पाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाया कि पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय को RSS का वैचारिक मंच बनाने का प्रयास किया जा रहा है। दरअसल, 21 जनवरी 2026 को आयोजित “श्रीमंत शंकरदेव शोधपीठ लोकार्पण समारोह” में डॉ. कृष्ण गोपाल (सह-सरकार्यवाह, RSS) को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। इसके विरोध में आज NSUI ने जोरदार प्रदर्शन किया है। एनएसयूआई का कहना है कि यह निर्णय विश्वविद्यालय की शासकीय मर्यादाओं, अकादमिक निष्पक्षता और संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के पूरी तरह विपरीत है। विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन पर कुलपति के नाम की पट्टिका लगाई। इस पर पदनाम लिखा था – कुलपति एवं RSS कार्यकर्ता। पाल ने कहा- RSS कोई शैक्षणिक संस्था नहीं बल्कि एक वैचारिक संगठन है। शासकीय विश्वविद्यालय किसी एक राजनीतिक या वैचारिक संगठन का मंच नहीं हो सकता। ऐसे में उनके पदाधिकारी को विश्वविद्यालय के मंच से मुख्य वक्ता बनाना विचारधारात्मक प्रचार की श्रेणी में आता है। एनएसयूआई के सवाल एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सवाल किए हैं कि- – किस नियम, अधिसूचना या वैधानिक प्रावधान के तहत RSS पदाधिकारी को मुख्य वक्ता बनाया गया? – क्या विश्वविद्यालय प्रशासन मानता है कि केवल संघ से जुड़े लोग ही ज्ञान और संस्कृति के प्रतिनिधि हैं? – अन्य विचारधाराओं से जुड़े शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को अवसर क्यों नहीं दिया गया? राजनीतिक एजेंडे का आरोप एनएसयूआई का आरोप है कि इस तरह के आयोजन संविधान की धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है। विश्वविद्यालय को एक विशेष राजनीतिक-वैचारिक एजेंडे का उपकरण बनाया जा रहा है। एनएसयूआई की मांग एनएसयूआई ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे कि RSS से जुड़े व्यक्ति को किस हैसियत और किस नियम के तहत आमंत्रित किया गया। भविष्य में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय सहित सभी शासकीय विश्वविद्यालयों में राजनीतिक या वैचारिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों को मुख्य वक्ता या मुख्य अतिथि बनाने पर तत्काल रोक लगाई जाए। ये रहे मौजूद इस विरोध प्रदर्शन में एनएसयूआई प्रभारी महामंत्री हेमंत पाल के साथ मोनू तिवारी, गवेश साहू, अंकित बंजारे, सुजीत सुमेर, मनीष बंधे, शेख अरसलान, आलोक खारे, हर्ष शर्मा, यश देवांगन, भोला विश्वकर्मा सहित अन्य छात्र नेता मौजूद रहे।



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