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कवर्धा शहर के कैलाश नगर स्थित कैलाश सरोवर में श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर श्रावणी उपाकर्म संस्कार हुआ। आयोजन विप्र समाज के अध्यक्ष बंटी मनीष तिवारी के नेतृत्व में हुआ। बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग शामिल हुए। ब्राह्मणों ने कुशा हाथ में लेकर कैलाश सरोवर में स्नान किया।
स्नान में गाय का दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र, मधु, शक्कर और भस्म का उपयोग हुआ। इस स्नान को आत्मशुद्धि और पापों के प्रायश्चित का माध्यम माना गया। इसके बाद वेदमंत्रों से अभिमंत्रित नया यज्ञोपवीत धारण किया गया। गायत्री मंत्र का जाप और हवन-पूजन भी हुआ। सनातन धर्म में यज्ञोपवीत धारण करना 16 संस्कारों में से एक है। इसे बाएं कंधे से दाएं कमर की ओर पहना जाता है। मल-मूत्र त्याग से पहले इसे बाएं कान पर तीन बार चढ़ाने की परंपरा है। यज्ञोपवीत जीर्ण-शीर्ण होने या किसी की मृत्यु पर सूतक लगने पर बदला जाता है।
ब्रह्मसूत्र से जुड़ा पर्व यह पर्व ब्रह्मसूत्र से जुड़ा है, जिसके तीन धागे देवऋण, पितृ ऋण और ऋषि ऋण के प्रतीक माने जाते हैं। श्रावणी पूर्णिमा को आत्मशुद्धि, यज्ञोपवीत परिवर्तन, वेद अध्ययन की शुरुआत, ऋषि तर्पण और रक्षाबंधन से जुड़ा पर्व माना जाता है। इसलिए ब्राह्मण समाज इस पर्व की प्रतीक्षा करता है। यह संस्कार आचार्य पं. शिवविलास शर्मा और पं. प्रमोद शर्मा ने कराया। पं. चंद्रप्रकाश उपाध्याय, गणेश तिवारी, पं. आनंद उपाध्याय, पं. मेघानंद उपाध्याय, विश्व प्रकाश उपाध्याय, हरिहर उपाध्याय, नंद कुमार शर्मा, रविंद्र शुक्ला, मुकेश तिवारी, देवेंद्र तिवारी आदि मौजूद थे।