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प्रदेश में नदियों और तालाबों को प्रदूषण से बचाने के लिए 18 स्थानों पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए गए हैं। इनकी क्षमता 408 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) है। इसके बावजूद नदियों की हालत दिन-प्रतिदिन और बिगड़ती जा रही है। एसटीपी स्थापित होने के बाद
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- केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट में खारुन प्रदेश की सबसे प्रदूषित नदी
यह स्थिति तब है जबकि केंद्र सरकार ने नगरीय निकायों को नदियों के किनारे बने एसटीपी का अधिकतम उपयोग कर उपचारित पानी को 100 किलोमीटर के दायरे में स्थित फैक्ट्रियों को बेचने के आदेश दे रखे हैं। ताकि नदियों पर औद्योगिक निर्भरता कम हो और सीवरेज जल का फिर से उपयोग हो सके।
प्रदेश में सबसे अधिक और सबसे बड़ी क्षमता वाले एसटीपी रायपुर नगर निगम क्षेत्र में स्थापित किए गए हैं। खारून नदी के किनारे कारा, निमोरा और चंदनीडीह में 200 एमएलडी क्षमता के तीन एसटीपी और भाठागांव के पास 6 एमएलडी का एक अतिरिक्त एसटीपी लगाया गया है। अमृत मिशन के तहत इन पर 150 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए, फिर भी खारुन नदी में 17 नालों का गंदा पानी लगातार गिर रहा है।
केंद्रीय प्रदूषण निवारण मंडल की रिपोर्ट के अनुसार खारुन नदी प्रदेश की सबसे अधिक प्रदूषित नदी बन चुकी है। यहां पानी की कंडक्टिविटी 2000 से ऊपर दर्ज की गई है, जबकि सुरक्षित सीमा 1000 से कम होनी चाहिए। वहीं, माल-जनित प्रदूषण दशनि वाली कॉलीफार्म की मात्रा 4120 पाई गई, जो 4000 से अधिक होने पर घातक मानी जाती है। रिपोर्ट में अरपा, शिवनाथ और हसदेव नदियों की स्थिति खारुन की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर बताई गई है।
करार की शर्तें नहीं मानी
रायपुर निगम ने खारुन नदी में स्थापित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में साफ होने वाले पानी को बेचने के लिए कुछ उद्योगों से एमओयू किया है। अब तक पानी ले जाना शुरू नहीं हो पाया है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि एसटीपी से अपनी फैक्ट्री तक पानी ले जाने का काम संबंधित फैक्ट्री मालिकों का है। वे पाइप लाइन डालने का काम कर रहे हैं। अब तक जितने अनुबंध हुए हैं. वह कुल क्षमता 200 एमएलडी के महन से 10-15% तक है।
नदी-तालाबों को साफ रखने के लिए फंड है
अमृत मिशन के तहत केंद्र सरकार ने प्रदेशभर में नदियों में मिलने वाले नालों के पानी को रोकने और नदी-तालाबों को साफ रखने के लिए फंड दिए हैं। इसी के तहत खारून नदी में एसटीपी बनाए गए हैं। सोमवार को नदी का दौरा किया गया। स्थिति काफी खराब है। नदी में नाले का पानी मल रहा है। एसटीपी का पानी बेचा जाना था। यह भी नहीं हो पाया। – मीनल चौबे, महापौर रामपुर