There are potholes on the road worth Rs 35 crores…now it will be made a four-lane road | 35 करोड़ की सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे…अब बनेगी फोरलेन: सरकार ने 63 करोड़ का प्रस्ताव भेजा, मोपका बाईपास में कार-बाइक चलना बंद,फंस रहे पहिए – Chhattisgarh News

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July 12, 2025


कोनी–मोपका बाईपास बनेगा फोरलेन।

बिलासपुर के कोनी से मोपका तक जाने वाला बाईपास अब नए रूप में नजर आएगा। सरकार ने इस सड़क को फिर से बनाने और फोरलेन में बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए 63.13 करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन को भेजा गया है। यह प्रस्ताव फिलहाल मंजूरी की प

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मोपका से सेंदरी के‎ पास रतनपुर हाईवे तक इस सड़क की लंबाई 14‎ किमी है, जिसमें 2 हजार छोटे बड़े गड्ढ़े हैं। सैकड़ों गड्ढे इतने खतरनाक हैं कि किसी की जान तक जा सकती है।एक से सवा फीट तक गहरे ‎गड्ढों के कारण लोगों की जान हर रोज ‎खतरे में पड़ रही है।

इस बाईपास को‎ राज्य सरकार ने साल 2016 में ‎करीब 35.88 करोड़ रुपए से‎ बनवाया था। लेकिन रख रखाव नहीं ‎होने के कारण अवधि खत्म होने से ‎पहले ही पूरी सड़क खत्म हो चुकी है।‎ हर दिन जाम, गड्ढों में फंसे हुए वाहन ‎और हादसों के खतरे की वजह से ‎लोगों ने अब कार, बाइक से इस‎ सड़क पर चलना बंद कर दिया है।‎

सड़क की तस्वीर देखिए…

बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भरने से ट्रकों के पहिए धंस रहे।

बारिश के दिनों में गड्ढों में पानी भरने से ट्रकों के पहिए धंस रहे।

दूर-दूर तक सड़क नहीं सिर्फ गड्ढे दिखते है, 8 जुलाई को यहां 42 ट्रकों की लंबी लाइन ‎लग गई थी।

दूर-दूर तक सड़क नहीं सिर्फ गड्ढे दिखते है, 8 जुलाई को यहां 42 ट्रकों की लंबी लाइन ‎लग गई थी।

ग्राउंड पर पहुंची दैनिक भास्कर की टीम‎

दैनिक भास्कर की टीम 8 जुलाई मंगलवार को मोपका-सेंदरी‎ बायपास का हाल जानने पहुंची। मोपका से सेंदरी के‎ पास रतनपुर हाईवे तक इस सड़क की लंबाई 14‎ किमी है, जिसमें 2 हजार छोटे-बड़े गड्ढे हैं। करीब‎ 100 इतने खतरनाक है कि किसी की जान तक ले ‎सकते हैं।

इस दौरान रतनपुर हाईवे की ओर से मोपका‎ आने वाले भारी वाहन के पहिए गड्ढों में फंसे हुए नजर ‎आए। इस वजह से करीब 42 ट्रकों की लंबी लाइन ‎लग गई थी। घंटों लंबा जाम लगा रहा। लोगों ने बताया ‎कि हर दिन ऐसा ही नजारा रहता है।‎

गड्‌ढों की गहराई नापती भास्कर की टीम।‎ करीब 12 इंच तक गड्ढा बना।

गड्‌ढों की गहराई नापती भास्कर की टीम।‎ करीब 12 इंच तक गड्ढा बना।

दो पहिया वाहन चालकों को भी होती है परेशानी।

दो पहिया वाहन चालकों को भी होती है परेशानी।

पूरी तरह उखड़ी सड़क

अब रतनपुर, कटघोरा की तरफ जाने‎ के लिए शहर के अंदर से होकर‎ आना-जाना कर रहे हैं।‎ मोपका बायपास से अब सिर्फ‎ भारी वाहनों का आना-जाना हो रहा‎ है। लेकिन अब इन वाहनों का चलना ‎भी मुश्किल हो चुका है। कारण ‎सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है।

यहां‎ भारी वाहन तो क्या दोपहिया गाड़ी‎ चलाना भी जोखिम भरा हो गया है। ‎इस साल 2016 में 35 करोड़ 88‎ लाख रुपए से बनी दो-तीन साल‎ बाद ही उखड़नी शुरू हो गई। ‎‎मरम्मत पर 5 करोड़ खर्च हो चुके हैं।‎

यह था मकसद

मोपका से रतनपुर‎ हाईवे और कोनी जाने वालों को शहर‎ से होकर गुजरने से बचाने सड़क‎ बनाई गई थी, लेकिन अब यह उद्देश्य‎ भी पूरा नहीं हो रहा। ‎मोपका- सेंदरी बायपास की हालत खराब हो चुकी है। डेढ़ से दो फीट तक गहरे गड्‌ढों में ट्रकों के पहिए भी समा जा रहे हैं।

ऐसी गड़बड़ी से सड़क पर हुए गड्ढे

‎विभागीय सूत्रों के मुताबिक सड़क में मुरुम का‎ लेयर 8 सीबीआर से अधिक होना था, लेकिन ‎तत्कालीन इंजीनियरों और ठेकेदार ने आसपास के‎ खेतों की काली मिट्टी डाल दी, वह भी 8 सीबीआर‎ से कम है। डामर उखड़ने से काली मिट्टी के कारण‎ ये सड़क दलदली हो गई। सड़क नए सिरे से बनाई‎ जाएगी तो पहले 1 मीटर तक खुदाई करनी पड़ेगी,‎ तभी मापदंड के अनुसार सही सड़क बनेगी।‎

ये हैं जिम्मेदार‎

  • उमेश नायक : निर्माण के दौरान इस‎प्रोजेक्ट के एसडीओ थे। वर्तमान में‎रिटायर हो चुके हैं।‎
  • आरके खांबरा : वे इस प्रोजेक्ट के‎कार्यपालन अभियंता थे। वर्तमान में सेतु‎विभाग में ईई है।‎
  • अनिल अग्रवाल : यह ठेका कंपनी‎का मालिक था। रायगढ़ में दफ्तर है।‎
बारिश के दिनों में हालत ज्यादा खराब रहती है। हादसों का खतरा बना रहा है। गाड़ियां जाम में फंसी रहती है

बारिश के दिनों में हालत ज्यादा खराब रहती है। हादसों का खतरा बना रहा है। गाड़ियां जाम में फंसी रहती है

अनिल अग्रवाल को मिला था टेंडर‎

बता दें कि यह सड़क पीडब्ल्यूडी की है और इसका निर्माण‎ ठेकेदार अनिल अग्रवाल ने किया था। जानकारों के ‎मुताबिक निर्माण के दौरान गुणवत्ता से जुड़े तमाम मापदंडों‎ की अनदेखी की गई।

जीएसबी डालने, बेस मापदंडों के‎ अनुसार नहीं होने, बीटी में डामर का सही अनुपात नहीं होने‎ के साथ ही मिट्टी फिलिंग में भारी लापरवाही बरती गई है। ‎यही कारण है कि यह सड़क भारी वाहनों के लायक कभी‎ बनी ही नहीं।‎

फाइल अभी मंत्रालय में है

PWD विभाग के ईई सीएस विंध्यराज ने कहा कि इस सड़क को फिर ‎से बनाने का प्रस्ताव है।‎ फिलहाल फाइल मंत्रालय ‎में है। शासन की मंजूरी‎ मिलने के बाद काम होगा।‎

रोजाना 1 हजार गाड़ियां का ट्रैफिक सड़क पर हैवी गाड़िया ज्यादा चलती हैं, दोपहिया-चार पहिया गाड़ियों को मिलाकर रोजाना 1 हजार गाड़ियों का ट्रैफिक रहता है। जिन्हें जानकारी है, वे लोग आते जाते नहीं।

बाइपास से रतनपुर की दूरी 15 किमी

सड़क मोपका से शुरू होकर रतनपुर गतौरी में जुड़ा है, और सीधे हाइवे में मिलता है। गतौरी से 15 किलोमीटर दूर रतनपुर है, सिटी से रतनपुर 28 किलोमीटर दूरी है, जबकि इस रास्ते से 15 किलोमीटर की दूरी पड़ती है, पौन घंटे की बचत होती है। जांजगीर, कोरबा, सीपत के लोगों को रतनपुर हाइवे पकड़ना है, वो इसी रास्ते से जाते है।

हाईकोर्ट ने तखतपुर-मल्हार की जर्जर सड़क पर मांगा शपथ पत्र

हाईकोर्ट ने बिलासपुर जिले के तखतपुर और मल्हार की जर्जर सड़कों को लेकर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने मीडिया में प्रकाशित खबर पर संज्ञान लेकर अफसरों से पूछा की हालत कब तक सुधरेगी।

चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने शहर से लेकर गांवों तक बदतर सड़कों को लेकर जनहित याचिका पर लोक निर्माण विभाग के सचिव और नगर निगम कमिश्नर से शपथपत्र के साथ जवाब मांगा है।

बता दें कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा ने अपोलो अस्पताल लिंगियाडीह मार्ग का दौरा किया था, जहां उन्होंने सड़क की चौड़ाई कम होने और अतिक्रमण के कारण मरीजों और परिजनों को हो रही परेशानियों को देखते हुए मामले को जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की है।

बदहाल सड़क की और भी तस्वीरें देखिए-

बाईपास में गाड़ी फंसने पर वाहनों की लंबी कतार लगी।

बाईपास में गाड़ी फंसने पर वाहनों की लंबी कतार लगी।

मोपका बाईपास पर रोजाना कई गाड़ियां फंसी रहती है।

मोपका बाईपास पर रोजाना कई गाड़ियां फंसी रहती है।

सड़क पर सैकड़ों बड़े बड़े गड्ढे है जिनमें भारी वाहन के गुजरने से पहिए फंस जाते हैं।

सड़क पर सैकड़ों बड़े बड़े गड्ढे है जिनमें भारी वाहन के गुजरने से पहिए फंस जाते हैं।

गड्ढों और खस्ताहाल सड़क के कारण बाईपास पर वाहनों की कतार लग जाती है।

गड्ढों और खस्ताहाल सड़क के कारण बाईपास पर वाहनों की कतार लग जाती है।

बाईपास के खस्ताहाल और गड्ढों के कारण सड़क पर कार-बाइक चलना बंद हो गया है।

बाईपास के खस्ताहाल और गड्ढों के कारण सड़क पर कार-बाइक चलना बंद हो गया है।

सड़क पर 1 से सवा फीट तक के गड्ढे हैं, यहां हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है।

सड़क पर 1 से सवा फीट तक के गड्ढे हैं, यहां हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है।

भारी वाहनों के पहिए अक्सर यहां गड्ढों में फंसे मिलते हैं।

भारी वाहनों के पहिए अक्सर यहां गड्ढों में फंसे मिलते हैं।

वाहनों के पहिए गड्ढे में फंसने से यहां जाम लगा रहता है।

वाहनों के पहिए गड्ढे में फंसने से यहां जाम लगा रहता है।

सड़क पर मौजूद एक से सवा फीट तक के 100 गड्ढे बेहद खतरनाक हैं।

सड़क पर मौजूद एक से सवा फीट तक के 100 गड्ढे बेहद खतरनाक हैं।

सड़क पर छोटे बड़े गड्ढों में बारिश का पानी भर गया है।

सड़क पर छोटे बड़े गड्ढों में बारिश का पानी भर गया है।

सड़क पर आए दिन गड्ढों में वाहनो के पहिए फंसे मिलते हैं।

सड़क पर आए दिन गड्ढों में वाहनो के पहिए फंसे मिलते हैं।

बारिश के दिनों यहां से गुजरने पर हमेशा हादसे का खतरा बना रहा है।

बारिश के दिनों यहां से गुजरने पर हमेशा हादसे का खतरा बना रहा है।

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जर्जर सड़कों को लेकर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई।

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