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महासमुंद ब्लाक में दिव्यांग बच्चों, उनके साथियों, पालकों और विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्यों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिपालन में समग्र शिक्षा के अंतर्गत प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। मुख्य उद्देश्य 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बाधारहित व अनुकूल वातावरण तैयार कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
डीएमसी रेखराज शर्मा ने प्रशिक्षण में कहा कि समावेशी शिक्षा का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को विद्यालय परिवेश में बिना किसी भेदभाव के शिक्षा उपलब्ध कराना है। शिक्षा हर बच्चे का मूल अधिकार है, इसलिए दिव्यांग बच्चों को संवैधानिक प्रतिबद्धता के तहत समान अवसर मिलना अनिवार्य है। समावेशी शिक्षा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने दिव्यांग बच्चों से व्यवहार के तरीके, चिह्नांकन चेकलिस्ट, दिव्यांगता के प्रकार, नई शिक्षा नीति, निशक्तजन अधिकार अधिनियम 2016, तथा शैक्षिक प्रशासक एवं पालकों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। सीईओ बीएस मण्डावी ने कहा कि पालकों और समाज को दिव्यांगजनों के प्रति सकारात्मक भाव विकसित करना चाहिए। दिव्यांगता विकास में बाधा नहीं है, बल्कि ऐसे बच्चों में विशेष प्रतिभा होती है और आज दुनिया में कई दिव्यांग व्यक्ति विशिष्ट पदों पर आसीन हैं। इस मौके पर बीआरसीसी जागेश्वर सिन्हा, सीएसी पवन साहू, गणेश टंडन, ललित किशोर बया, टाकेश्वर साहू, आशीष साहू, सुरेंद्र चन्द्राकर, ए चंद्रशेखर डोरा, लेखापाल रेणु चन्द्राकर सहित अन्य मौजूद थे।
मास्टर ट्रेनर बीआरपी अनीता निर्मलकर, स्पेशल एजुकेटर तुलसी साहू, केआर सोनवानी और लव कुमार निर्मलकर ने शासन के मान्यता प्राप्त 21 प्रकार की दिव्यांगता जैसे पूर्ण दृष्टिहीनता, अल्प दृष्टिबाधित, श्रवण व मूक बाधित, प्रमस्तिष्कीय पक्षाघात, स्वलीनता, थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, अस्थिबाधित, सिकल सेल, मानसिक बीमारी, बहु विकलांगता और अन्य श्रेणियों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। आवश्यकता आधारित सुविधाओं पर चर्चा की गई।