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कोंडागांव में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत एनजीओ द्वारा संचालित बालगृह के कर्मचारियों ने मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने अपनी सेवाएं यथावत रखने की मांग की है। कर्मचारियों ने बताया कि वे कई वर्षों से अनाथ, निराश्रित और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की सेवा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कर रहे हैं। इन कर्मियों ने बालगृह को बच्चों के लिए एक सुरक्षित परिवार के रूप में विकसित किया है। इसी बालगृह से निकली बालिका योगिता मंडावी को जूडो में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है। यह कर्मचारियों की कर्मठता और निरंतर मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि बालगृह की बालिकाएं आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल रही हैं। कर्मचारियों ने बच्चों की पूरी जिम्मेदारी निभाई कर्मचारियों ने कोरोना महामारी के दौरान भी अपने परिवारों से दूर रहकर बालगृह परिसर में निवास किया। उन्होंने महीनों तक बच्चों की सुरक्षा, भोजन, इलाज, पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी निभाई। अब कर्मचारियों को आशंका है कि उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं, जिससे उनके परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। उनका कहना है कि इसका सीधा असर बालगृह में रह रहे बच्चों की देखभाल और भविष्य पर भी पड़ेगा, क्योंकि वर्तमान कर्मचारी इस कार्य में पूर्णतः प्रशिक्षित और अनुभवी हैं। कलेक्टर से सेवाओं को यथावत रखने की मांग की कर्मचारियों ने कलेक्टर से मांग की है कि उनके सेवा-कार्य, अनुभव और त्याग को देखते हुए एनजीओ द्वारा संचालित बालगृह में कार्यरत सभी कर्मचारियों को यथावत सेवा में रखा जाए, ताकि बच्चों की देखरेख की व्यवस्था प्रभावित न हो। इस अवसर पर बड़ी संख्या में बालगृह कर्मचारी उपस्थित थे।
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