2008 में छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में जांजगीर-चांपा जिले की छात्रा पोरा बाई ने नकल से प्रदेश की सूची …और पढ़ें

HighLights
- छत्तीसगढ़ की छात्रा पोरा बाई ने वर्ष 2008 में दी थी परीक्षा
- नतीजे घोषित होने के बाद हुआ संदेह, जांच में पकड़ी गई
- नकल में पोरा बाई का साथ देने वाले 3 आरोपियों को भी सजा
नईदुनिया प्रतिनिधि, जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 2008 में आयोजित 12वीं बोर्ड परीक्षा में टॉपर रही पोरा बाई सहित चार आरोपियों को नकल प्रकरण के मामले में दोषी पाया गया है। न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को पांच-पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अर्थदंड भी लगाया गया है। यह फैसला करीब 18 वर्ष पुराने मामले में सुनाया गया है, जिसे लेकर शिक्षा जगत में एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जानकारी के अनुसार मामले में परीक्षा देकर टॉप करने वाली पोरा बाई, उसका साथ देने वाले तत्कालीन प्राचार्य, केंद्राध्यक्ष, सहायक केंद्राध्यक्ष को भी पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई गई है। लगभग 18 वर्ष पहले 2008 में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में जांजगीर-चांपा जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिर्रा की छात्रा पोरा बाई ने प्रदेश की सूची में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद मंडल के अधिकारियों को संदेह हुआ, जिसके बाद जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि छात्रा की उत्तरपुस्तिका संदिग्ध है। शिक्षा मंडल के प्रारंभिक जांच प्रतिवेदन के आधार पर पोरा बाई सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ परीक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
निचली अदालत ने आरोपियों को कर दिया था बरी
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी चांपा सुबोध कुमार मिश्रा ने 27 दिसंबर 2020 को सभी नौ आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इसके बाद शासन की ओर से उक्त निर्णय के खिलाफ अपील दायर की गई। जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि पोरा बाई की उत्तरपुस्तिका बदली गई थी, उसमें उसकी हैंडराइटिंग नहीं थी। इस तर्क के आधार पर दोष सिद्ध माना गया और सजा का आदेश दिया।
अपने रिश्तेदार के पास रहकर पढ़ रही थी आरोपी
पोरा बाई मूलतः तत्कालीन रायपुर जिले की निवासी थी, जो वर्तमान में बलौदा बाजार-भाटापारा जिले के बिलाईगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरा की रहने वाली है। वर्ष 2008 में वह जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम पंचायत बिर्रा में अपने एक रिश्तेदार के यहां रहकर पढ़ाई कर रही थी और वहीं से 12वीं बोर्ड परीक्षा में शामिल हुई थी। परीक्षा के दौरान नकल प्रकरण सामने आने के बाद मामला दर्ज किया गया था।
नहीं लगी नौकरी, पारिवारिक स्थिति भी कमजोर
पोरा बाई की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता नरेश शर्मा ने बताया कि वर्तमान में पोरा बाई बेरोजगार है और उसका विवाह नहीं हुआ है। घर की पारिवारिक स्थिति भी काफी कमजोर है। उन्होंने कहा कि फैसले के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। इस निर्णय के बाद शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और परीक्षा की शुचिता को लेकर एक सख्त संदेश गया है।