लापरवाही का खामियाजा आज बच्चों को भुगतना पड़ा। इस संबंध में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ने बताया कि चार बच्चों की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि अन्य बच्चे खतरे से बाहर हैं। वहीं, क्षेत्रीय विधायक ने घटना को संज्ञान में लेते हुए ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर से फोन पर चर्चा कर बच्चों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
Publish Date: Sat, 13 Dec 2025 07:34:10 PM (IST)
Updated Date: Sat, 13 Dec 2025 08:08:31 PM (IST)

HighLights
- उपचार जारी मामला शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चौरभाठा का
- प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा आज बच्चों को भुगतना पड़ा
- ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ने बताया चार बच्चों की स्थिति गंभीर है
जांजगीर-चाम्पा। जिले नवागढ़ विकास खण्ड के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चौरभाठा में शनिवार 13 दिसंबर को मध्याह्न भोजन खाने के बाद 25 बच्चे फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए। भोजन करते ही बच्चों को उल्टी-दस्त की शिकायत शुरू हो गई, जिससे स्कूल में अफरा-तफरी मच गई।
मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल में मध्याह्न भोजन के अंतर्गत राहुल स्वसहायता समूह द्वारा खीर-पूड़ी परोसी गई थी। नियमानुसार भोजन परोसने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच शिक्षकों द्वारा की जानी थी, लेकिन बिना जांच के भोजन सीधे बच्चों को परोस दिया गया। भोजन करने के कुछ ही समय बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होते देख शिक्षकों एवं पालकों द्वारा बच्चों को नवागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।
जहाँ 4 बच्चों की हालत नाजुक बताई जा रही है, जबकि शेष बच्चों की हालत स्थिर है और उनका उपचार जारी है। बच्चों से बातचीत में यह भी सामने आया कि पूर्व में भी इसी स्वसहायता समूह द्वारा खराब गुणवत्ता वाला भोजन परोसा गया था, जिसकी मौखिक शिकायत बच्चों ने अपने पालकों एवं शिक्षकों से की थी, बावजूद इसके मध्याह्न भोजन की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं किया गया।
लापरवाही का खामियाजा आज बच्चों को भुगतना पड़ा। इस संबंध में बीएमओ नवागढ़ यशपाल खन्ना ने बताया कि अभी पांच बच्चे भर्ती हैं। चार बालिका और एक बालक भर्ती है। बालक को अभी आधे घंटे पहले भर्ती किया गया है। बाकी बच्चों की स्थिति सामान्य होने पर छुट्टी दे दी गई है। क्षेत्रीय विधायक व्यास कश्यप ने घटना को संज्ञान में लेते हुए ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर से फोन पर चर्चा कर बच्चों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
घटना की जानकारी मिलते ही जिला शिक्षा अधिकारी अशोक सिन्हा भी अस्पताल पहुंचे और बच्चों के स्वास्थ्य की स्थिति का जायजा लिया। अब यह देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस गंभीर लापरवाही को किस दृष्टिकोण से देखता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाती है। यह घटना मध्याह्न भोजन योजना की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।