अब अनवर ढेबर और केके श्रीवास्तव से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी EOW, सामने आएगा मास्टरमाइंड का नाम

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January 11, 2026


ईडी के बाद अब ईओडब्ल्यू अनवर ढेबर और केके श्रीवास्तव से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। इसके लिए ईओडब्ल्यू ने कोर्ट में प्रोडक्शन वारंट की अर्जी दाखिल …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 11 Jan 2026 07:41:13 AM (IST)Updated Date: Sun, 11 Jan 2026 07:55:35 AM (IST)

CG Liquor Scam: अब अनवर ढेबर और केके श्रीवास्तव से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी EOW, सामने आएगा मास्टरमाइंड का नाम
अनवर ढेबर और केके श्रीवास्तव से होगी पूछताछ

HighLights

  1. ईडी के बाद अब ईओडब्ल्यू करेगी शराब घोटाले की जांच
  2. अनवर ढेबर और तांत्रिक केके श्रीवास्तव से पूछताछ की तैयारी
  3. पूछताछ के लिए कोर्ट में प्रोडक्शन वारंट की अर्जी दाखिल

राज्य ब्यूरो,नईदुनिया,रायपुर: 3,200 करोड़ रुपये के शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बाद अब राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भी जांच तेज कर दी है। झारखंड एसीबी द्वारा शराब कारोबारी नवीन केडिया की गिरफ्तारी के बाद मामले की कड़ियां और मजबूत होती नजर आ रही हैं। इसी कड़ी में ईओडब्ल्यू ने रायपुर सेंट्रल जेल में बंद होटल कारोबारी अनवर ढेबर और तांत्रिक केके श्रीवास्तव से पूछताछ की तैयारी की है।

ईओडब्ल्यू ने दोनों आरोपितों से पूछताछ के लिए कोर्ट में प्रोडक्शन वारंट की अर्जी दाखिल की है। इससे पहले ईडी भी दोनों से लंबी पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसी अब अनवर ढेबर और केके श्रीवास्तव से आमने-सामने पूछताछ कर घोटाले से जुड़े अहम तथ्यों और नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश में जुटी है।

बयानों से होगा बड़ा खुलासा

ईओडब्ल्यू अधिकारियों के मुताबिक, अनवर ढेबर पर राज्य में शराब कारोबार के पूरे सिंडिकेट को संचालित करने का आरोप है। वहीं, केके श्रीवास्तव पर इस अवैध नेटवर्क से अर्जित पैसों को छुपाने, निवेश करने और लेन-देन की व्यवस्था संभालने की भूमिका होने का संदेह है। एजेंसी का मानना है कि दोनों के बयानों से घोटाले के मास्टरमाइंड और राजनीतिक संरक्षण से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं।

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चुनिंदा कंपनियों को सीधा लाभ मिला

जांच में सामने आया है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल 2019 से 2023 के दौरान राज्य की शराब नीति में ऐसे बदलाव किए गए, जिससे कुछ चुनिंदा कंपनियों को सीधा लाभ मिला। लाइसेंस की शर्तें इस तरह तय की गईं कि सीमित सप्लायरों को ही ठेका मिल सके। इन कंपनियों ने नोएडा की एक फर्म के माध्यम से नकली होलोग्राम और सील तैयार कराई। बाद में इन्हें सरकारी शराब दुकानों के जरिए बेचा गया।

चूंकि इस बिक्री का डेटा शासन के रिकार्ड में दर्ज नहीं हो रहा था, इसलिए बिना एक्साइज टैक्स दिए शराब बेची जाती रही। इससे राज्य सरकार को करीब 2165 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। अब ईओडब्ल्यू की सक्रियता से इस बड़े घोटाले में कई नए राजफाश की उम्मीद की जा रही है।



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