छत्तीसगढ़ से सेंट्रल अमेरिका के इस खूबसूरत देश में निर्यात हुई ‘खास चावल’ की पहली खेप, जानिए क्या है खासियत

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November 6, 2025


सेंट्रल अमेरिका के देश कोस्टा रीका में छत्तीसगढ़ से 12 टन फोर्टिफाइड राइस की पहली खेप भेजी गई है। केंद्रीय उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स पर ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। मुख्यमंत्री साय ने इसे आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है।

Publish Date: Wed, 05 Nov 2025 12:08:28 PM (IST)

Updated Date: Wed, 05 Nov 2025 12:09:59 PM (IST)

छत्तीसगढ़ से सेंट्रल अमेरिका के इस खूबसूरत देश में निर्यात हुई 'खास चावल' की पहली खेप, जानिए क्या है खासियत
कोस्टा रीका के लिए चावल की पहली खेप रवाना

HighLights

  1. छत्तीसगढ़ से कोस्टा रीका भेजा गया खास चावल
  2. 12 टन फोर्टिफाइड राइस की पहली खेप रवाना
  3. उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर दी जानकारी

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर: कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने छत्तीसगढ़ से कोस्टा रीका के लिए 12 टन फोर्टिफाइड चावल कर्नेल की पहली निर्यात खेप भेजी है। कोस्टा रीका मध्य अमेरिका में कैरिबियाई क्षेत्र में स्थित एक देश है।

इस निर्यात की जानकारी केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इंटरनेट मीडिया हैंडल पर पोस्ट करके दी है। उन्होंने लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुपोषण के खिलाफ अभियान को आगे बढ़ाते हुए यह वैश्विक स्तर पर किया गया प्रयास न केवल हमारे विदेशी व्यापार को सशक्त करता है, बल्कि हमारे पोषण मिशन को भी नई ऊर्जा प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्यात छत्तीसगढ़ के किसानों, मिल संचालकों और उद्योगों की मेहनत, गुणवत्ता और समर्पण का परिणाम है। आज हमारा छत्तीसगढ़ केवल भारत का अन्नदाता नहीं, बल्कि पोषण, नवाचार और गुणवत्ता का वैश्विक ब्रांड बन रहा है। यह गर्व का क्षण है, जो हमारे प्रदेश को वैश्विक व्यापार और पोषण मिशन – दोनों में अग्रणी बनाता है।

जाने क्या है फोर्टिफाइड राइस कर्नेल?

फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन-बी12 जैसे आवश्यक पोषक तत्वों का समावेश किया जाता है। यह प्रयास न केवल खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करता है, बल्कि समाज के पोषण स्तर को भी बेहतर बनाता है। अब छत्तीसगढ़ के उत्पाद वैश्विक बाजार में ‘पोषण के प्रतीक’ के रूप में उभर रहे हैं।





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