प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चीफ इंजीनियर का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र अवैध, बर्खास्तगी की लटकी तलवार

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March 7, 2026


प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के मुख्य अभियंता (CE) केके कुटारे के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को अवैध घोषित करते हुए निरस्त कर दिया गया है। …और पढ़ें

Publish Date: Sat, 07 Mar 2026 08:40:25 AM (IST)Updated Date: Sat, 07 Mar 2026 09:45:49 AM (IST)

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चीफ इंजीनियर का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र अवैध, बर्खास्तगी की लटकी तलवार

HighLights

  1. उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति का फैसला
  2. मूल निवास महाराष्ट्र के तुमसर में स्वीकार किया था
  3. इसलिए उनका प्रमाण पत्र छत्तीसगढ़ में मान्य नहीं है

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के मुख्य अभियंता (CE) केके कुटारे के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को अवैध घोषित करते हुए निरस्त कर दिया है। इस निर्णय के बाद कुटारे की सेवा से बर्खास्तगी की संभावना बढ़ गई है।

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने डोंगरगांव जनपद उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौकर और विजय मिश्रा द्वारा 2017 से 2025 के बीच की गई शिकायतों के आधार पर यह निर्णय लिया।

मूल निवास महाराष्ट्र के तुमसर में स्वीकार किया था

कुटारे वर्तमान में पीएमजीएसवाइ और विकास अभिकरण के मुख्य अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। जांच में समिति ने पाया कि कुटारे ने अपना मूल निवास महाराष्ट्र के तुमसर में स्वीकार किया था, जबकि उन्होंने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रमाण पत्रों के आधार पर लाभ प्राप्त किया।

इसलिए उनका प्रमाण पत्र छत्तीसगढ़ में मान्य नहीं है

समिति ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि 1935 के जन्म रजिस्टर के अनुसार आवेदक के दादा का नाम तुमसर में दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार, अनुसूचित जाति का लाभ केवल उसी राज्य में मिल सकता है, जहां व्यक्ति का मूल निवास हो। चूंकि कुटारे का मूल निवास महाराष्ट्र पाया गया, इसलिए उनका प्रमाण पत्र छत्तीसगढ़ में मान्य नहीं है।

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कुटारे को पक्ष रखने के अवसर दिए, उपस्थित नहीं हुए

छानबीन समिति ने कुटारे को अपना पक्ष रखने के लिए कई अवसर दिए, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। अंततः समिति ने उनके जाति प्रमाण पत्र को फर्जी मानते हुए निरस्त करने का आदेश पारित किया। इस समिति में डॉ. सारांश मित्तर, विनीत नंदनवार और रितुराज रघुवंशी जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।



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