अधिसूचना जारी: छत्तीसगढ़ में नक्सल पुनर्वास नीति लागू, क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों में बनेंगी समितियां

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April 11, 2025


Naxal Rehabilitation Policy 2025: हर जिले व सब-डिविजनल स्तर पर एक-एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति होगी, जिनका मोबाइल नंबर, ई-मेल व पता राज्य शासन को भेजा जाएगा। ये सभी पुनर्वास कार्यों की निगरानी करेंगे।

By Shashank Shekhar Bajpai

Publish Date: Fri, 11 Apr 2025 12:12:45 PM (IST)

Updated Date: Fri, 11 Apr 2025 12:48:33 PM (IST)

अधिसूचना जारी: छत्तीसगढ़ में नक्सल पुनर्वास नीति लागू, क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों में बनेंगी समितियां
पुलिस की मौजूदगी में समर्पण करने वालीं महिला नक्सली। – फाइल फोटो।

राज्य ब्यूरो, रायपुर। Naxal Rehabilitation Policy 2025: राज्य सरकार की नक्सलवादी आत्मसमर्पण और पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 प्रदेश में लागू हो गई है। यह दो साल या नई नीति लागू किए जाने तक प्रभावशील रहेगी। गृह विभाग की ओर से 28 मार्च 2025 को जारी अधिसूचना के अनुसार इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी जिलों में कलेक्टर की अध्यक्षता में विशेष समिति का गठन होगा।

पुलिस अधीक्षक को सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। वनमंडलाधिकारी, जिला पंचायत के सीईओ, कलेक्टर की ओर नामांकित दो अन्य अधिकारी व सशस्त्र बलों के प्रतिनिधियों को भी समिति में शामिल किया जाएगा। हर जिले व सब-डिविजनल स्तर पर एक-एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति होगी, जिनका मोबाइल नंबर, ई-मेल व पता राज्य शासन को भेजा जाएगा। ये सभी पुनर्वास कार्यों की निगरानी करेंगे।

120 दिनों के अंदर होगा पुनर्वास

राज्य स्तर पर भी गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जाएगा। इसमें पुलिस महानिदेशक सदस्य रहेंगे। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, उप पुलिस महानिरीक्षक (नक्सल अभियान) सदस्य सचिव और अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव नामांकित शासकीय अधिकारी सदस्य होंगे।

गृह विभाग ने निर्देशित किया है कि राज्य गठन के बाद से अब तक के सभी पीड़ित प्रकरणों को चिह्नित किया जाए। आत्मसमर्पित नक्सलियों का चयन कर राहत और पुनर्वास की कार्रवाई 120 दिनों के भीतर प्राथमिकता पर की जाए।

प्रदेश में सक्रिय नक्सलियों पर उनके पद के अनुसार इनाम घोषित है। जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर पुलिस अधिकारी-कर्मचारी व समर्पण करने पर आत्मसमर्पित को दी जाएगी। सेंट्रल कमेटी सचिव व पोलित ब्यूरो सदस्यों पर सर्वाधिक एक-एक करोड़ रुपये का इनाम है।

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नक्सल पीड़ितों को मिलेगी ये मदद

मृत्यु होने पर: पांच लाख रुपये, पुलिस के विशेष सहयोगी की मृत्यु होने पर 10 लाख, केंद्रीय योजना के अतिरिक्त।

नक्सल हिंसा में अपंग व गंभीर घायल: पांच लाख व दो लाख रुपये, पुलिस सहयोगी को आठ लाख व दो लाख रुपए।

चल संपत्ति (अनाज, कपड़े, घरेलू सामान) के नुकसान पर: 40 हजार रुपये की सहायता l

क्षति होने पर: कच्चे मकान पर 60 हजार, पक्के के लिए 1.50 लाख, बैलगाड़ी, नाव, ट्रैक्टर-ट्राली, जीप, ट्रक, रोड रोलर, जेसीबी, पोकलेन व सड़क निर्माण में शामिल अन्य उपकरण पर 60 हजार से 8 लाख तक की सहायता।

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समर्पित नक्सली को चार डिसमिल जमीन

  • सक्रिय पांच लाख या अधिक के इनामी नक्सली को शहरी क्षेत्र में चार डिसमिल (1742 वर्गफुट) जमीन।
  • ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतम एक हेक्टेयर कृषि भूमि।
  • जमीन नहीं दिए जाने पर अचल संपत्ति अथवा जमीन क्रय करने के लिए दो लाख की अनुदान राशि।
  • आत्मसमर्पण के बाद प्रति व्यक्ति को 50 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि।
  • आत्मसमर्पण के तीन वर्ष के भीतर विवाह करने के इच्छुक होने पर एक लाख रुपये अनुदान राशि।

विशेष पोर्टल किया जा रहा विकसित

पुनर्वास नीति के लिए विशेष पोर्टल विकसित किया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक पीड़ित और आत्मसमर्पित की जानकारी दर्ज होगी और उन्हें एक यूनिक आईडी दी जाएगी। अधिकारी पोर्टल के डैशबोर्ड का नियमित अवलोकन कर राहत व पुनर्वास के कार्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करेंगे।

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पीड़ित को जमीन, घर या राशि

ग्रामीण क्षेत्र में 1.5 हेक्टेयर कृषि भूमि या शहरी क्षेत्रों में चार डिसमिल (1742 वर्गफुट) आवासीय भूमि।

भूमि उपलब्ध नहीं कराए जाने पर ग्रामीण क्षेत्र में चार लाख और शहरी क्षेत्र में आठ लाख रुपये की सहायता।

तीन वर्ष के भीतर कृषि भूमि खरीदने पर अधिकतम दो एकड़ की भूमि पर स्टॉम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क से पूरी छूट।



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