छत्तीसगढ़ के सेंट्रल जेलों में अब AI कैमरों से रखी जाएगी कैदियों की हर गतिविधि पर नजर, तैयारी शुरू

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October 21, 2025


छत्तीसगढ़ के सभी सेंट्रल जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चौकस करने के लिए जेल परिसर में एसआई युक्त सीसीटीवी कैमरा लगाए जाएगें। एआई तकनीक से कैदियों की गतिविधियों की निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा और आपात स्थितियों की त्वरित पहचान में मदद मिलेगी। सु्प्रीम कोर्ट की ओर से जेलों की स्थिति सुधारने को लेकर निर्देश दिए गए हैं।

Publish Date: Sat, 18 Oct 2025 03:35:02 PM (IST)

Updated Date: Sat, 18 Oct 2025 03:39:30 PM (IST)

छत्तीसगढ़ के सेंट्रल जेलों में अब AI कैमरों से रखी जाएगी कैदियों की हर गतिविधि पर नजर, तैयारी शुरू
सेंट्रल जेलों में लगाए जाएंगे एआई सीसीटीवी कैमरा

HighLights

  1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से जेल परिसर किया जाएगा लैस
  2. केंद्रीय जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत करने की तैयारी
  3. जेलों की स्थिति सुधारने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्देश मिले

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर: राज्य की पांचों केंद्रीय जेलों की सुरक्षा व्यवस्था अब और अधिक मजबूत होने जा रही है। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से पूरे जेल परिसर को लैस करने की तैयारी है। एआई युक्त कैमरे से निगरानी होने से कोई भी बंदी या सजायाफ्ता कैदी भागने की कोशिश करता है तो संवेदनशील स्थिति को एआई कैमरा भांपते ही जेल प्रशासन को तत्काल अलर्ट भेजेगा।

रायपुर समेत बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और दुर्ग सेंट्रल जेल की निगरानी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए जिला स्तरीय समितियों से सुझाव मांगे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि एआई तकनीक से कैदियों की गतिविधियों की निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा और आपात स्थितियों की त्वरित पहचान में मदद मिलेगी।

अधिकारियों ने बताया कि जेलों की स्थिति सुधारने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्देश दिए गए है। चूंकि एआई तकनीक का उपयोग अब हर क्षेत्र में किया जा रहा है लिहाजा, प्रदेश की सेंट्रल जेलों में भी इस तकनीक का इस्तेमाल करने की कवायद शुरू की गई है। एआई कैमरे का जेलों में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है, इस पर सुझाव मांगा गया है।

जेल में ऐसे कैमरों की सबसे ज्यादा जरुरत

जेलों में एआई युक्त कैमरों की सबसे ज्यादा आवश्यकता है, जो सामान्य कैमरों से कहीं ज्यादा अलर्ट देते हैं। ये पल-पल की गतिविधियों को नोटिस तो करते ही हैं साथ ही संभावित खतरों पर जेल प्रशासन को अलर्ट मोड में भी लाते हैं। इस तकनीक की मदद से बंदियों के संदिग्ध व्यवहार तक को पकड़ा जा सकता है। फेस रिकाग्निशन (बायोमेट्रिक साफ्टवेयर) जैसी तकनीक की मदद से बंदियों की दिनभर की गतिविधियों का आसानी से पता लग सकेगा।

कैदियों की मानसिक स्थिति पर नजर

एआई तकनीक की मदद से जेल प्रशासन को यह जानकारी मिल सकेगी कि कोई कैदी मानसिक तनाव में है या किसी नकारात्मक सोच से ग्रस्त है। इसके आधार पर समय रहते उचित कदम उठाए जा सकेंगे।

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अवैध गतिविधियों पर लगेगा अंकुश

जेल मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि एआई युक्त कैमरे की निगरानी से जेल परिसरों में अवैध गतिविधियों, मोबाइल और मादक पदार्थों के इस्तेमाल के मामलों में भी कमी आएगी। साथ ही, कैदियों के बीच होने वाले झगड़ों और हिंसक घटनाओं को भी रोका जा सकेगा। छत्तीसगढ़ की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है। तकनीक के माध्यम से जेलों की सुरक्षा और प्रबंधन को बेहतर बनाना न केवल समय की मांग है, बल्कि एक आवश्यक सुधारात्मक कदम भी है।



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