छत्तीसगढ़ के 335 कॉलेजों में प्रोफेसरों के 760 पद खाली, चार सालों से रुकी हुई है भर्ती प्रक्रिया

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November 3, 2025


छत्तीसगढ़ के कॉलेजों में 760 प्रोफेसरों के पद खाली हैं, जिससे कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को समस्याओं की समाना करना पड़ रहा है। प्रदेश में पिछले 4 सालों से प्रध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया अटकी हुई है।

Publish Date: Mon, 03 Nov 2025 04:30:43 PM (IST)

Updated Date: Mon, 03 Nov 2025 04:36:51 PM (IST)

छत्तीसगढ़ के 335 कॉलेजों में प्रोफेसरों के 760 पद खाली, चार सालों से रुकी हुई है भर्ती प्रक्रिया
4 साल से प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया अटकी

HighLights

  1. 2021 में शुरू हुई 595 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया अब तक अधूरी
  2. कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुसंधान कार्य बुरी तरह प्रभावित
  3. PRSU में गेस्ट फैकल्टी बनने की प्रतिस्पर्धा इस बार और कठिन हुई

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर: प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया पिछले चार सालों से अधर में लटकी है। इसके चलते राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 335 सरकारी कॉलेजों में प्रोफेसर के स्वीकृत 760 पद खाली हैं। जबकि 2021 में शुरू हुई 595 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया अब तक अंतिम चरण में नहीं पहुंच पाई है।

595 पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा के आधार पर कुल 1533 अभ्यर्थी दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाए गए थे। यह प्रक्रिया पूरे हुए दो माह से ज्यादा का समय बीत गया है। लेकिन अब तक अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलावा नहीं आया है। इन पदों में सबसे अधिक रिक्तियां राजनीति शास्त्र (75), कामर्स (57), हिंदी (66), और भौतिक शास्त्र (60) जैसे विषयों में थीं।

कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता का बुरा हाल

चार साल बीतने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं होने से न केवल उच्च शिक्षा विभाग की कार्य प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा है, बल्कि कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुसंधान कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। छात्रों को अनुभवी प्रोफेसरों की कमी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्हें अतिथि व्याख्याताओं के भरोसे पढ़ाई करनी पड़ रही है।

इस तरह से देर हो रही भर्ती प्रक्रिया

  • प्रोफेसर के पदों पर भर्ती के लिए 2021 में विज्ञापन जारी हुआ। दिसंबर 2023 से दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन अब तक यह पूरी नहीं हो पाई है।
  • दो चरणों में दस्तावेजों का सत्यापन किया गया। पहले चरण में 13 विषयों के बाद दूसरे में 17 विषयों के लिए पात्र-अपात्र अभ्यर्थियों की सूची जारी करने में भी अत्यधिक की गई है।
  • राज्य निर्माण के बाद पहली बार सीधी भर्ती के बावजूद स्वीकृत 760 प्रोफेसर पदों में से एक भी भरा नहीं जा सका है।

अभ्यर्थी कर रहे पात्र-अपात्र सूची जारी करने की मांग

अभ्यर्थी अब जल्द से जल्द पात्र-अपात्र सूची जारी करने और साक्षात्कार की तिथियां घोषित करने की मांग कर रहे हैं। उच्च शिक्षा के जानकारों का मानना है कि इस विलंब से शिक्षण सत्र 2025-26 पर भी असर पड़ना तय है। सरकार और संबंधित आयोग को इस मामले की गंभीरता को समझते हुए इस अटकी हुई प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा करने की आवश्यकता है, ताकि राज्य के युवाओं और उच्च शिक्षा के भविष्य को बचाया जा सके।

पीआरएसयू में गेस्ट फैकल्टी बनने की होड़

पंडित रवि शंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में गेस्ट फैकल्टी बनने की प्रतिस्पर्धा इस बार और कठिन हो गई है। विवि द्वारा जारी आमंत्रण के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं। केवल इतिहास विषय में एक पद के लिए 46 उम्मीदवार सामने आए हैं, वहीं समाजशास्त्र में 42 दावेदारों ने दावेदारी पेश की है। अंग्रेजी, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान जैसे विषयों में भी स्थिति लगभग यही है।

गेस्ट फैकल्टी के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर तय की गई थी। विवि से सबंद्ध सभी कॉलेजों में चयन प्रक्रिया अकादमिक मेरिट और साक्षात्कार के आधार पर की जाएगी। कुल 121 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें इतिहास और समाजशास्त्र विषयों में सर्वाधिक प्रतिस्पर्धा दर्ज की गई है। जिले के करीब 14 कॉलेजों से अब तक 758 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

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गेस्ट फैकल्टी के भरोसे कॉलेज

नियमित भर्ती लंबे समय से नहीं हो रही है। ऐसे में कॉलेजों में शिक्षण कार्य गेस्ट फैकल्टी के भरोसे ही चल रहा है। यही वजह है कि अस्थायी नियुक्तियों के लिए भी अब उम्मीदवारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार आवेदन 30 से 40 प्रतिशत तक ज्यादा आए हैं।

नवंबर के दूसरे सप्ताह तक नियुक्तियां

सभी विषयों में मेरिट सूची तैयार कर नवंबर के दूसरे सप्ताह तक नियुक्तियां की जाएंगी। वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियमित भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल गेस्ट फैकल्टी ही उनके लिए एकमात्र विकल्प है।



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