अवैध मतांतरण को लेकर सभी संवैधानिक पहलुओं को सुरक्षित करने के बाद इस विधेयक को फरवरी-मार्च 2026 के बजट सत्र में विधानसभा में पेश किया जा सकता है। सरका …और पढ़ें

HighLights
- मतांतरण विधेयक को लेकर मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक
- प्रस्तावित ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक’ के मसौदे पर विस्तार से चर्चा
- विधेयक को बजट सत्र में विधानसभा में पेश किया जा सकता है
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया,रायपुर: प्रदेश में प्रलोभन और दबाव के माध्यम से होने वाले अवैध मतांतरण को रोकने के लिए सरकार ने कानूनी घेराबंदी तेज कर दी है। गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रिमंडलीय उप-समिति की पहली बैठक में प्रस्तावित ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक’ के मसौदे पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि जबरन होने वाली गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए है।
संविधान और सुरक्षा का संतुलन
गृह मंत्री विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों की मौजूदगी में हुई इस बैठक में विधेयक के कानूनी पहलुओं पर मंथन हुआ। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी को धर्म के प्रचार का अधिकार है, लेकिन प्रलोभन या धमकी से मंतातरण कराना संवैधानिक रूप से गलत है। सरकार का प्रयास है कि नया कानून इतना मजबूत और तर्कसंगत हो कि उसे न्यायालय में चुनौती न दी जा सके।
बजट सत्र में पेश करने की तैयारी
समिति अन्य राज्यों के मतांतरण विरोधी कानूनों और उनके समक्ष आई कानूनी अड़चनों का भी बारीकी से अध्ययन कर रही है। सूत्रों की मानें तो सभी संवैधानिक पहलुओं को सुरक्षित करने के बाद इस ऐतिहासिक विधेयक को फरवरी-मार्च 2026 के बजट सत्र में विधानसभा में पेश किया जा सकता है। सरकार का दावा है कि इस कानून से खासकर आदिवासी क्षेत्रों में आ रही शिकायतों का समाधान होगा और सामाजिक सौहार्द बना रहेगा।
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गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से बस्तर सहित प्रदेश के अन्य आदिवासी क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों द्वारा आदिवासी समुदाय के लोगों को पैसे, नौकरी और इलाज जैसे प्रलोभन देकर बहलाने के मामले समाने आ रहे हैं। हिंदू संगठनों की ओर से आए दिन इसके विरोध में शिकायतें की जा रही है। वहीं बस्तर क्षेत्र में आदिवासी समुदाय भी इसका लगातार विरोध कर रहे हैं।