छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा विभाग की सुस्ती से 595 प्रोफेसरों की भर्ती पांच साल से अटकी, 335 सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई प्रभावित

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January 11, 2026


पूर्ववर्ती कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार में वर्ष 2021 में शुरू हुई 595 प्रोफेसरों की सीधी भर्ती प्रक्रिया पांच साल बीत जाने के बाद भी अधर में लटकी है। …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 11 Jan 2026 07:28:12 AM (IST)Updated Date: Sun, 11 Jan 2026 07:33:52 AM (IST)

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा विभाग की सुस्ती से 595 प्रोफेसरों की भर्ती पांच साल से अटकी, 335 सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई प्रभावित
595 प्रोफेसरों की सीधी भर्ती प्रक्रिया पांच साल बीत जाने के बाद भी अधर में लटकी (सांकेतिक फोटो)

HighLights

  1. दस्तावेज सत्यापन के चार माह बाद भी साक्षात्कार का इंतजार
  2. छत्तीसगढ़ के 335 सरकारी कॉलेजों में शैक्षणिक व्यवस्था बेपटरी
  3. भूपेश बघेल सरकार में वर्ष 2021 में शुरू हुई थी भर्ती प्रक्रिया

राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर: राज्य के सरकारी कॉलेजों में उच्च शिक्षा का स्तर सुधारने के दावे कागजी साबित हो रहे हैं। प्रदेश के 335 शासकीय महाविद्यालयों में प्रोफेसरों की कमी का आलम यह है कि स्वीकृत 760 पदों में से अधिकांश रिक्त पड़े हैं। विडंबना यह है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार में वर्ष 2021 में शुरू हुई 595 प्रोफेसरों की सीधी भर्ती प्रक्रिया पांच साल बीत जाने के बाद भी अधर में लटकी है।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) और उच्च शिक्षा विभाग के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा प्रदेश के हजारों छात्र और अभ्यर्थी भुगत रहे हैं। सीजीपीएससी के अधिकारियों के मुताबिक उच्च शिक्षा को लगातार तकनीकी सहयोग के लिए पत्र भेजा रहा है। कुछ अभ्यर्थियों ने दावा आपत्ति की है, इसका निपटारा करने में ही समय लग रहा है। भर्ती में हो रही देरी का मुख्य कारण उच्च शिक्षा विभाग से तकनीकी सहयोग न मिलना बताया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, लिखित परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों द्वारा कुछ तकनीकी विषयों और नियमों पर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। सीजीपीएससी ने इन आपत्तियों के निराकरण के लिए उच्च शिक्षा विभाग से अभिमत (टेक्निकल ओपेनियन) मांगा है। हालांकि, विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के कारण यह मामला फाइलों में दबा हुआ है। 28 नवंबर को उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने भी भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने और आपत्तियों के त्वरित निपटारे के निर्देश दिए थे, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी है।

उम्र सीमा का विवाद और विज्ञापन

राज्य गठन के बाद पहली बार प्रोफेसर के पदों पर इतनी बड़ी सीधी भर्ती निकाली गई है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने सितंबर 2021 में इसका विज्ञापन जारी किया था, लेकिन तब उम्र सीमा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया रोक दी गई थी। वर्तमान विष्णु देव साय सरकार के आने के बाद 2024 में इस प्रक्रिया में पुनः गति आई। सरकार ने स्थानीय निवासियों के लिए अधिकतम उम्र सीमा 56 वर्ष (एक जनवरी 2021 की स्थिति में न्यूनतम 31 वर्ष) तय की है, जबकि अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों के लिए यह सीमा 45 वर्ष रखी गई है।

इतने अभ्यर्थियों को नियुक्ति का इंतजार

सीजीपीएससी ने लिखित परीक्षा के आधार पर कुल 1,533 अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन के लिए चयनित किया था। यह प्रक्रिया पूर्ण हुए चार माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन इंटरव्यू के लिए अब तक बुलावा नहीं आया है। अभ्यर्थी असमंजस में हैं कि आखिर चयन प्रक्रिया कब पूरी होगी। सबसे ज्यादा राजनीति शास्त्र में 75 पद रिक्त हैं। इसी तरह हिंदी में 66 पद,भौतिक शास्त्र में 60 पद और कामर्स 57 पद रिक्त हैं।

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कॉलेजों में शैक्षणिक संकट

एक ओर सरकार उच्च शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर कालेजों में प्रोफेसरों के पद खाली होने से शोध और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रभावित हो रहा है। यदि जल्द ही साक्षात्कार की तिथि घोषित नहीं की गई, तो शैक्षणिक सत्र 2025-26 पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ना तय है।

अधिकारियों को दिए हैं निर्देश

भर्ती की प्रक्रिया में किसी भी तरह का बाधा न हो, इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।

– टंकराम वर्मा, मंत्री, उच्च शिक्षा



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