मुंबई, हावड़ा, पुणे, अहमदाबाद की ट्रेनों की लेटलतीफी से छत्तीसगढ़ के यात्री परेशान

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January 2, 2026


हावड़ा से मुंबई रेल रूट के बीच ट्रेनों के लगातार लेट चलने से यात्री परेशान हैं। छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली कई ट्रेनें 12-12 घंटे लेट चल रही है। रायगढ़ स …और पढ़ें

Publish Date: Fri, 02 Jan 2026 12:25:57 PM (IST)Updated Date: Fri, 02 Jan 2026 12:42:36 PM (IST)

Indian Railways: मुंबई, हावड़ा, पुणे, अहमदाबाद की ट्रेनों की लेटलतीफी से छत्तीसगढ़ के यात्री परेशान
रेलवे स्टेशन पर लगी यात्रियों की भीड़।

HighLights

  1. 158% क्षमता की पटरियों का उपयोग, दुरंतो भी 13 घंटे लेट
  2. ईब-झारसुगुड़ा के बीच रेल लाइन का अटका काम बना मुसीबत
  3. ट्रेनों की संख्या तो बढ़ाई गई, लेकिन नई पटरियों के बिछाने में देरी

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। देश के सबसे पुराने रेल रूटों में से एक हावड़ा और मुंबई के बीच रेलगाड़ियां रेंग रही हैं। हालत ऐसी हो गई है कि इस रूट पर चलने वाली सभी आठ गाड़ियां औसतन पांच से आठ घंटे की देरी से चल रही हैं। कभी-कभी तो यह देरी 12-12 घंटे की हो जा रही है। गुरुवार को भी छत्रपति शिवाजी टर्मिनस-हावड़ा के बीच चलने वाली दुरंतो एक्सप्रेस 13 घंटे देरी से चली। यही हाल इस रूट की अन्य ट्रेनों का भी है।

ट्रेनों की लेटलतीफी के कारण राजधानी से मुंबई, हावड़ा, पुणे, अहमदाबाद जैसे शहरों के लिए जाने वाले यात्री परेशान हो रहे हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार रायगढ़ से आगे ईब और झारसुगुड़ा के बीच चौथी रेल लाइन के निर्माण और शुरू होने में देरी के कारण ट्रेनों की समय सारिणी प्रभावित हुई हैं।

ईब से लेकर झारसुगुड़ा के बीच चौथी लाइन शुरू हो तो बने काम

रेलवे सूत्रों के अनुसार बिलासपुर से झारसुगड़ा के बीच 206 किलोमीटर के रेलखंड पर अगस्त तक 150 किलोमीटर चौथी लाइन का काम पूरा हो गया था। ईब से लेकर झारसुगुड़ा के बीच चौथी लाइन का काम पूरा होने, उसे सुरक्षा आयुक्त की मंजूरी मिलने और संचालन शुरू होने से इस रूट पर ट्रेनों की समय सारिणी सुधरेगी। जब तक ऐसा नहीं होता है, तब तक यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ेगी।

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पटरियों पर दबाव बढ़ा

रेलवे सूत्रों के अनुसार बीते कई दशकों में नई रेलगाड़ियों की संख्या तो बढ़ाई गई है, लेकिन नई पटरियों के बिछाने में देरी की गई। सिग्नलिंग प्रणाली में सुधार भी देरी का कारण बना। इससे गाड़ियों का संचालन प्रभावित हुआ। रेलवे की रिपोर्ट बताती है कि पटरियों पर ट्रेनों की परिचालन क्षमता का 158 फीसदी उपयोग किया जा रहा है। इसका मतलब है कि तय गति में जिन पटरियों पर 100 ट्रेनों का संचालन होना चाहिए, उनपर 158 का संचालन हो रहा है।



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