‘मोदी जी अब काटने में लग गए हैं…’, बजट पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल का तंज, युवाओं और किसानों के हाथ लगा झुनझुना

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February 1, 2026


Bhupesh Baghel on Budget: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026-27 को ‘घोर निर …और पढ़ें

Publish Date: Sun, 01 Feb 2026 07:40:57 PM (IST)Updated Date: Sun, 01 Feb 2026 07:40:57 PM (IST)

'मोदी जी अब काटने में लग गए हैं...', बजट पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल का तंज, युवाओं और किसानों के हाथ लगा झुनझुना
बजट पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल का तंज। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. भूपेश बघेल का बजट पर तीखा हमला
  2. बजट को बताया ‘शेखचिल्ली का शोरबा’
  3. बोले- धुआं बहुत है और धार बहुत पतली

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026-27 को ‘घोर निराशाजनक’ और ‘अव्यावहारिक’ करार दिया है। बजट पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी सरकार केवल ‘शेखचिल्ली’ की तरह बातें कर रही है, जबकि हकीकत में देश का हर वर्ग इस बजट से ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

बजट में ‘धुआं’ ज्यादा और ‘धार’ कम

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि यह बजट “शेखचिल्ली का शोरबा” जैसा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार विश्व में अर्थव्यवस्था के नंबर और ‘विश्व गुरु’ होने की शेखी बघारती रही, लेकिन इस बजट ने सरकार की आर्थिक विफलता की कलई खोल कर रख दी है। बघेल ने आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में न तो राजस्व में अपेक्षित बढ़ोतरी हुई और न ही टैक्स वसूली मजबूत हो सकी। उन्होंने कहा, “निर्मला जी के इस धुआंधार बजट में धुआं बहुत ज्यादा है, लेकिन इसकी धार बहुत पतली है।”

मध्यम वर्ग और गरीबों के साथ ‘अन्याय’

बघेल ने बजट को मध्यम वर्ग (Middle Class) विरोधी बताते हुए कहा कि इसमें लोअर मिडिल क्लास, गरीब, किसान, मजदूर और युवाओं के लिए कुछ भी ठोस प्रावधान नहीं है। उन्होंने इसे एक ‘अन्यायपूर्ण’ बजट करार दिया, जिससे आम जनता को केवल निराशा हाथ लगी है। उनके अनुसार, महंगाई को नियंत्रित करने के लिए बजट में कोई उपाय नहीं किए गए हैं, जिससे आम आदमी की थाली और महंगी होने वाली है।

शेयर बाजार की गिरावट और आर्थिक असुरक्षा

शेयर बाजार की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर से निवेशकों का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है। उन्होंने कहा, “शेयर बाजार बैठ गया है और निवेशक लगातार अपना पैसा बाजार से बाहर निकाल रहे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी हलचल से बाजार पर होने वाले प्रतिकूल असर को रोकने के लिए सरकार के पास कोई ठोस संकल्प या योजना नहीं है।

रोजगार और उद्योग जगत में सन्नाटा

युवाओं और व्यापार जगत की स्थिति पर बात करते हुए बघेल ने कहा कि इस बजट में रोजगार सृजन का कोई जिक्र नहीं है। निवेश का माहौल इतना खराब है कि नए निवेशक घबरा रहे हैं और पुराने उद्योगों व व्यापार को चला पाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार युवाओं को ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ दिखा रही है, जबकि धरातल पर बेरोजगारी चरम पर है।

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सब्सिडी में कटौती और किसान-महिला उपेक्षा

बघेल ने सामाजिक सुरक्षा और कृषि क्षेत्र के बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि खाद सब्सिडी, खाद्य सब्सिडी और मनरेगा (MNREGA) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कटौती की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बजट में महिलाओं के लिए कोई विशेष योजना नहीं है और स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के अनुसार एमएसपी (MSP) की गारंटी देने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। बघेल ने इसे ‘कटौती का बजट’ बताते हुए कहा कि मोदी सरकार अब जनता के अधिकारों को ‘काटने’ में लग गई है।



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