ये है धरावी मॉडल
मुंबई के धरावी इलाके में झुग्गियों को हटाकर उसी स्थान पर बहुमंजिला इमारतें अदानी ग्रुप द्वारा बनाई जा रही हैं। निवासियों को निशुल्क पक्का मकान, बुनियादी सुविधाएं और पुनर्वास उपलब्ध कराया जा रहा है। जबकि डेवलपर को व्यावसायिक विकास का अधिकार दिया जाता है।
रायपुर में कैसे होगा लागू
रायपुर में भी धरावी की तर्ज पर स्लम भूमि का पुनर्गठन होगा। पात्र परिवारों को ईडब्ल्यूएस फ्लैट, सड़क, सीवरेज, पानी-बिजली जैसी सुविधाएं मिलेंगी। अतिरिक्त भूमि व्यवसायिक उपयोग के लिए दी जाएगी।
शहर की इन स्लम बस्तियों का होगा पुनर्निर्माण
डगनिया बस्ती- शहर में नालों के बीच बसी यह घनी झुग्गियों वाली बस्ती संकरी गलियों, जलभराव और शौचालय जैसे संकट से जूझ रही है। बरसात में हालात बदतर हो जाते हैं। वहीं आग और बीमारी का हमेशा खतरा बना रहता है।
आमापारा- यहां पुराना आबादी क्षेत्र, जर्जर कच्चे मकान, पेयजल व ड्रेनेज की समस्या है। मुख्य बाजार के पास होने से भूमि की कीमत अधिक, लेकिन रहवासियों की हालत बेहद कमजोर है।
अमरपुरी- नालों के किनारे बसी इस बस्ती में गंदे पानी से स्वास्थ्य का खतरा बना रहता है। यहां नियमित कचरा उठाव, बच्चों और महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण का अभाव है।
भीम नगर- अस्थायी निर्माण, बिजली के अवैध कनेक्शन, तंग रास्ते इस बस्ती की पहचान है। बरसात में कीचड़ और जलभराव यहां की प्रमुख समस्या बनती है।
उत्कल नगर (आकाशवाणी क्षेत्र)- शहर के बीच स्थित यह बस्ती चारों ओर सरकारी व व्यावसायिक इलाके से घिरी है। यहां की जमीन की कीमत अधिक, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है।
योजना की मुख्य विशेषताएं
पीएमएवाई-अर्बन के एएचपी मॉडल में इन-सीटू स्लम रीडेवलपमेंट (आइएसएसआर) के तहत झुग्गी बस्तियों का उसी स्थान पर पुनर्निर्माण किया जाएगा। पात्र स्लमवासियों को ईडब्ल्यूएस श्रेणी के पक्के फ्लैट मिलेंगे। परियोजना में जी 6/जी 8 बहुमंजिला इमारतें, सड़क, सीवरेज, पानी-बिजली, सामुदायिक सुविधाएं शामिल होंगी। स्लम भूमि का आंशिक उपयोग निजी डेवलपर द्वारा व्यावसायिक विकास के लिए होगा, जिससे परियोजना की वित्तीय जरूरतें पूरी की जाएंगी।
आंकड़ों में प्रोजेक्ट
कुल भूमि क्षेत्र लगभग 19.19 हेक्टेयर है। प्रस्तावित ईडब्ल्यूएस आवासीय इकाइयों की संख्या 4,044 है। अनुमानित परियोजना लागत 232 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुनर्विकास के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) शासन को भेजा जा चुका है। इसकी स्वीकृति के बाद चरणबद्ध तरीके से निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
इनका क्या कहना
मीनल चौबे, महापौर, नगर निगम, रायपुर का कहना है कि “शहर में स्लमवासियों के यथास्थान पुनर्विकास से गरीब परिवारों को सुरक्षित, पक्का आवास और बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। हमारा पूरा प्रयास रहेगा कि हम लोगों को उन्हीं के स्थान पर एक अच्छा आवास और सुविधाएं उपलब्ध करा सकें। “
आकाश तिवारी, नेता प्रतिपक्ष, नगरनिगम, रायपुर ने कहा कि योजना कागजों में अच्छी लग सकती है, लेकिन जमीनी सच्चाई अलग है। निजी हाथों को लाभ पहुंचाने के नाम पर अगर गरीबों के अधिकारों से समझौता होगा तो जमकर विरोध किया जाएगा। क्योंकि मुंबई की धारावी झुग्गी बस्ती का फायदा अदानी ग्रुप ने उठाया है।