सात साल भाजपा, पांच साल कांग्रेस की सत्ता, लेकिन पूरी नहीं हो पाई पड़ताल

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December 25, 2025


राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। झीरमघाटी हमले (Jhiram Valley Maoist attack) को 12 साल बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ितों के परिवारों को आज भी न्याय का इंतजार है। इन वर्षों में प्रदेश ने पांच साल कांग्रेस और सात साल भाजपा का शासन देखा। केंद्र में भी 2014 से एनडीए (NDA) की सरकार है, बावजूद इसके जांच की धीमी चाल ने कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं।

नड्डा के बयान ने सियासी हलचल बढ़ाई

वर्तमान विष्णु देव साय सरकार में भी कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद एसआइटी (SIT) की जांच को लेकर कोई हलचल नहीं है। 22 दिसंबर को जनादेश परब के दौरान जांजगीर-चांपा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का बयान कि कांग्रेसियों ने ही झीरम में कांग्रेसियों को मरवाया, राजनीति में हलचल तो बढ़ा दी है। इसके साथ ही प्रश्न भी खड़े कर दिया कि जांच पूरी नहीं होने के लिए कौन सी सरकार जिम्मेदार है।

मामले में कोई निष्कर्ष आता नहीं दिख रहा

इन 12 वर्षों में चार साल भाजपा की डॉ. रमन सिंह की सरकार, पांच साल भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार और अभी दो साल से प्रदेश में भाजपा की विष्णु देव सरकार सत्ता में है। सबसे अधिक भाजपा की ही सरकार रही। इसके बाद भी मामले में कोई निष्कर्ष आता नहीं दिख रहा है।

एनआइए और एसआइटी के बीच उलझी फाइलें

घटना के बाद एनआइए (NIA) ने जांच शुरू की और तत्कालीन रमन सरकार के दौरान 39 माओवादियों के खिलाफ दो चार्जशीट पेश की। नौ गिरफ्तारियां भी हुईं, लेकिन कांग्रेस ने इस जांच को अधूरा बताते हुए खारिज कर दिया। 2018 में सत्ता में आते ही भूपेश बघेल सरकार ने एसआइटी (SIT) का गठन किया, जिसे एनआइए ने चुनौती दी।

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस को जांच की अनुमति दी, लेकिन तब तक 2023 के चुनाव आ गए और सत्ता परिवर्तन हो गया। अब कांग्रेस प्रश्न कर रही है कि एसआइटी से जांच क्यों नहीं कराई जा रही है। झीरम की जांच पूरी नहीं होने के लिए कांग्रेस ने भाजपा को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं भाजपा सरकार के जिम्मेदार पूर्ववर्ती सरकार पर ही ठीकरा फोड़ रहे हैं।

न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पर भी सियासी रार

जांच के लिए गठित न्यायिक आयोगों की रिपोर्ट भी विवादों की भेंट चढ़ गई। 2013 में गठित जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा आयोग ने आठ साल बाद 2021 में 4,184 पन्नों की रिपोर्ट सीधे राज्यपाल को सौंपी। कांग्रेस सरकार ने इसे अधूरी बताते हुए विधानसभा में पेश करने के बजाय दो जस्टिसों के साथ एक नया आयोग गठित कर दिया।

तत्कालीन सरकार ने जस्टिस सतीश के. अग्निहोत्री की अध्यक्षता में नया आयोग बनाया, लेकिन हाई कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। तर्क दिया गया कि जब तक पहली रिपोर्ट विधानसभा में नहीं आती, नई प्रक्रिया उचित नहीं है।

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क्या था झीरम घाटी हत्याकांड?

25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन रैली सुकमा से जगदलपुर लौट रही थी। शाम करीब चार बजे झीरम घाटी के पास माओवादियों ने पेड़ों को गिराकर काफिला रोका और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ला और उदय मुदलियार समेत 32 लोग मारे गए थे।

हम यही सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इस मामले में राज्य सरकार एसआइटी से जांच क्यों नहीं करवा रही है। नड्डा ने कांग्रेस नेताओं के बलिदानियों के इस मामले में बयानबाजी कर उनका अपमान किया है।

– भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

हम क्या कर रहे हैं, ये सवाल हमसे करने के पहले भूपेश ये बताएं कि उनकी सरकार में उन्होंने पांच साल तक झीरमकांड की जांच के लिए क्या किया, वे कहते थे कि उनके जेब में झीरम का सबूत है, वो सबूत कहां गया। -विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़



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