नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर: एक्सप्रेस-वे पर अधूरा रिटेंशन वाल एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ। सड़क किनारे नाले के पास किसी तरह की बेरीकेडिंग नहीं होने से शनिवार सुबह एक मोटरसाइकिल सवार युवक सीधे नाले में जा गिरा।
सुबह करीब 9.30 बजे दिलीप नामक युवक तेज रफ्तार में एक्सप्रेस-वे से गुजर रहा था, तभी पुलिया के पहले संतुलन बिगड़ा और वह नाले में गिर गया। गनीमत रही कि युवक को मामूली चोटें आईं। बताया गया है कि युवक माना बस्ती का निवासी है और उसका उपचार जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक एक्सप्रेस-वे किनारे रिटेंशन वाल निर्माण का काम लंबे समय से अधूरा पड़ा है। न तो नाले के किनारे सुरक्षा रेलिंग लगाई गई है और न ही कोई चेतावनी संकेत। रात के समय यह इलाका और भी खतरनाक हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हादसा पहले से तय था, बस समय का इंतजार था।
और भी हो सकते हैं हादसे
घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। रोजाना सैकड़ों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन न सीजी रोड कारपोरेशन ने सुध ली और न ही पीडब्ल्यूडी ने।
रिटेंशन वाल का काम रुका
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर रिटेंशन वाल निर्माण का काम क्यों अटका हुआ है। सीजी रोड कारपोरेशन और लोक निर्माण विभाग द्वारा शुरू किया गया यह कार्य महीनों से अधूरा पड़ा है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए सड़क को वाहनों के लिए खोल दिया गया, जो सीधे तौर पर गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। जिला प्रशासन की निगरानी भी इस मामले में सवालों के घेरे में है।
हादसे के बाद नईदुनिया की पड़ताल: मौत के खुले स्पाट, सुरक्षा नदारद
नईदुनिया टीम ने शहर के उन स्थानों की पड़ताल की, जहां खुले गड्ढे और अधूरे निर्माण लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं। हालात चौंकाने वाले हैं, न बेरीकेडिंग, न चेतावनी बोर्ड और न ही रात में कोई रिफ्लेक्टर।
- स्पॉट–1: इंडस्ट्रियल कॉलोनी, फेज-2 यहां निर्माणाधीन बेसमेंट का गड्ढा लंबे समय से खुला पड़ा है। चारों तरफ बांस-बल्ली की नाममात्र घेराबंदी है, जो रात में दिखाई भी नहीं देती। अंधेरे में वाहन फिसलने का खतरा बना रहता है।
- स्पॉट–2: अनुपम गार्डन के सामने- व्यस्त ज्वाइंट रोड पर सड़क चौड़ीकरण के नाम पर गहरा गड्ढा खोद दिया गया है। सर्विस रोड से गुजरने वालों के लिए यह जगह जानलेवा बन चुकी है। थोड़ी सी चूक सीधे 20 फीट नीचे ले जा सकती है।
- स्पाट–3: हीरापुर कॉलोनी- बिल्डर द्वारा 10 से 15 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया। हादसे के बाद नोटिस जरूर जारी हुआ, लेकिन मौके पर आज भी ठोस सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं। सिर्फ एक तरफ गार्ड और ऊपर से लटकी रस्सियां दिखती हैं।
- स्पॉट–4: रिंग रोड-2, बंगाली होटल के पास- सड़क निर्माण के दौरान खोदा गया गड्ढा महीनों से खुला है। भारी वाहनों की आवाजाही के बीच हादसे का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों की कई शिकायतों के बावजूद हालात जस के तस हैं।
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इन गड्ढों ने पहले भी ली जान
नवंबर 2025: हीरापुर में खुले गड्ढे में गिरने से युवक की मौत हुई थी।
सितंबर-अक्टूबर 2025: अलग-अलग इलाकों में निर्माण स्थलों पर हादसे, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।
नगर निगम क्षेत्र में निर्माण के दौरान सुरक्षा घेरा, चेतावनी बोर्ड और रात में रिफ्लेक्टर लगाना अनिवार्य है, लेकिन नियम कागजों तक ही सीमित हैं। जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर बच निकलते हैं, और आम लोगों की जान हर दिन खतरे में डाली जा रही है।