550 करोड़ की हेराफेरी में 3 आरोपी गिरफ्तार, MRP से 3 गुना महंगे दामों पर बेचे उपकरण

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January 19, 2026


Hamar Lab Scam: छत्तीसगढ़ की आम जनता को निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘हमर लैब’ योजना में एक बड़े भ्रष्टाचार का खु …और पढ़ें

Publish Date: Mon, 19 Jan 2026 08:26:10 PM (IST)Updated Date: Mon, 19 Jan 2026 08:26:10 PM (IST)

CGMSC Scam: 550 करोड़ की हेराफेरी में 3 आरोपी गिरफ्तार, MRP से 3 गुना महंगे दामों पर बेचे उपकरण
CGMSC Scam: 550 करोड़ की हेराफेरी में 3 आरोपी गिरफ्तार।

HighLights

  1. 550 करोड़ की हेराफेरी में 3 आरोपी गिरफ्तार
  2. MRP से 3 गुना महंगे दामों पर बेचे उपकरण
  3. घोटाले में रायपुर और पंचकुला के कारोबारी गिरफ्तार

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ की आम जनता को निःशुल्क डायग्नोस्टिक जांच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘हमर लैब’ योजना में एक बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (EOW) ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों पर निविदा प्रक्रिया में धोखाधड़ी कर शासन को लगभग ₹550 करोड़ की आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

ब्यूरो द्वारा इस मामले में जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • अभिषेक कौशल: डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि., पंचकुला।
  • राकेश जैन: प्रोप्राईटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज, रायपुर।
  • प्रिंस जैन: लाईजनर, रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स प्रा.लि. (यह शशांक चोपड़ा का जीजा बताया जा रहा है)।

फर्जी निविदा और कार्टेलाइजेशन का खेल

विवेचना में यह तथ्य सामने आया है कि जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए मेडिकल उपकरण एवं रिएजेंट्स की खरीद हेतु पुल टेण्डरिंग (Pool Tendering) का सहारा लिया गया। मोक्षित कॉर्पोरेशन को निविदा दिलाने के उद्देश्य से रिकॉर्डर्स एण्ड मेडिकेयर सिस्टम्स और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निविदा में भाग लिया। जांच में यह भी पाया गया कि प्रतिस्पर्धा को खत्म करने के लिए इन फर्मों ने आपस में समन्वय और ‘कार्टेलाइजेशन’ किया था।

समान पैटर्न और तीन गुना अधिक दाम

शॉर्टलिस्ट हुई तीनों फर्मों ने टेंडर में उत्पाद, पैक-साइज़ और रिएजेंट्स का विवरण एक ही समान पैटर्न में भरा था। यहां तक कि जिन उत्पादों के नाम निविदा दस्तावेज में स्पष्ट नहीं थे, उन्हें भी तीनों फर्मों ने एक जैसा दर्शाया। इस मिलीभगत के जरिए मोक्षित कॉर्पोरेशन ने सबसे कम दर कोट की, जो वास्तव में एमआरपी (MRP) से तीन गुना तक अधिक थी। इस अनुचित भुगतान के कारण सरकारी खजाने को ₹550 करोड़ का भारी नुकसान हुआ है।

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27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर आरोपी

गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को 19 जनवरी 2026 को रायपुर के विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने आरोपियों को 27 जनवरी 2026 तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

ईओडब्ल्यू के अनुसार, जनहित से जुड़ी इस योजना में शासकीय राशि के दुरुपयोग के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी और आने वाले समय में अन्य संबंधितों के विरुद्ध भी कठोर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।



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