Mahadev Betting App case: सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, तीन महीने की मांगी मोहलत

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August 23, 2025


छत्तीसगढ़ के चर्चित महादेव सट्टा ऐप मामले में आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट के समक्ष याचिका लगाई है। मामले में मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने कोर्ट ने 3 महीने का समय मांगा हैं, जिसके बाद वह खुद कोर्ट में पेश होंगे।

By Deepak Shukla

Publish Date: Sat, 23 Aug 2025 03:29:29 PM (IST)

Updated Date: Sat, 23 Aug 2025 03:33:35 PM (IST)

Mahadev Betting App case: सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, तीन महीने की मांगी मोहलत
मुख्य आरोपियों ने लगाई कोर्ट में याचिका

HighLights

  1. सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने वारंट रद्द करने के लिए लगाई याचिका
  2. महादेव एप मामले में मुख्य आरोपियों ने कोर्ट ने मांगा 3 महीने का समय
  3. आरोपियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी, विशेष कोर्ट में सुनवाई

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। ऑनलाइन गेमिंग बैन के बीच महादेव सट्टा ऐप के सरगनाओं में खलबली मची हुई है। छत्तीसगढ़ से जुड़े महादेव सट्टा एप के मामले में मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने गिरफ्तारी वारंट रद्द करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। आरोपियों ने अदालत से आग्रह किया है कि उन्हें तीन महीने का समय दिया जाए, जिसके भीतर वे स्वयं अदालत में पेश हो जाएंगे।

बता दें कि महादेव सट्टा ऐप मामले में दोनों आरोपी पहले से ही भारतीय जांच एजेंसियों के शिकंजे में हैं। इनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया जा चुका है। अब तीन नवंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष अदालत इस आवेदन पर अपना फैसला सुनाएगी। मामले की जानकारी ईडी की ओर से अधिवक्ता सौरभ पांडे ने दी।

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अदालत का दरवाजा खटखटा रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिवक्ता सौरभ पांडे ने बताया कि बीते दिनों विशेष न्यायालय में दोनों आरोपियों की गैरहाजिरी पर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। उस वारंट को रद्द करने के लिए आरोपियों ने हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया था, जिसे वृहद सुनवाई के बाद खारिज कर दिया गया।

इसके बाद आरोपी रवि उप्पल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जो अब तक लंबित है। वहीं, एक बार फिर नया आवेदन लगाया गया है, जिसमें कहा गया है कि वारंट को निरस्त किया जाए और उन्हें तीन महीने का समय दिया जाए ताकि वे स्वयं अदालत में पेश हो सकें।



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