Tomar Brothers Case: सूदखोर वीरेंद्र तोमर ग्वालियर से गिरफ्तार, हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद बदली थी लोकेशन

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November 8, 2025


By Deepak Shukla

Publish Date: Sat, 08 Nov 2025 09:18:46 PM (IST)

Updated Date: Sat, 08 Nov 2025 09:18:46 PM (IST)

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। पुलिस ने सूदखोर वीरेंद्र तोमर ऊर्फ रूबी तोमर को मध्यप्रदेश के ग्वालियर से गिरफ्तार कर लिया है। क्राइम ब्रांच और पुरानी बस्ती थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में आरोपित वीरेंद्र को पकड़ा है। उसके खिलाफ मारपीट, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, सूदखोरी और अन्य गंभीर अपराधों के कई मामले दर्ज हैं। वहीं छोटे भाई रोहित तोमर की तलाश की जा रही है।

जानकारी के अनुसार, वीरेंद्र और उसका भाई रोहित तोमर के खिलाफ तेलीबांधा थाना में कारोबारी ने मारपीट और धमकी देने की शिकायत दर्ज कराई थी। एफआइआर दर्ज होने के बाद दोनों आरोपित दो जून से फरार चल रहे थे। पुलिस की लगातार दबिश के बावजूद दोनों भाइयों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कानूनी दांव-पेच अपनाए, लेकिन राहत नहीं मिली। हाल ही में हाईकोर्ट ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने इनकी तलाश और तेज कर दी।

इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि वीरेंद्र तोमर मध्यप्रदेश के ग्वालियर में छिपा हुआ है। सूचना के आधार पर रायपुर पुलिस ने टीम गठित कर ग्वालियर भेजी। क्राइम ब्रांच ने वीरेंद्र की काल लोकेशन ट्रेस कर घेराबंदी की और अंततः उसे गिरफ्तार कर लिया।

पांच हजार का इनाम घोषित था

दोनों फरार भाइयों की गिरफ्तारी पर एसएसपी डा. लाल उम्मेद सिंह ने पहले ही पांच-पांच हजार इनाम की घोषणा की थी। लंबे समय तक पुलिस को चकमा देने के बाद आखिरकार वीरेंद्र पुलिस के शिकंजे में आ गया।

रिश्तेदार के घर से हुई गिरफ्तारी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वीरेंद्र तोमर को पुलिस ने ग्वालियर में उसके एक रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि फरारी के दौरान वह उत्तरप्रदेश और राजस्थान के कई शहरों में छिपता रहा था। हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उसे गिरफ्तारी का भय सताने लगा, जिसके चलते वह ग्वालियर भाग गया था।

वीरेंद्र तोमर उर्फ रूबी तोमर के खिलाफ दर्ज केस

– 2006: आजाद चौक में कारोबारी पर चाकू से हमला

– 2010: गुढियारी में मारपीट और उगाही

– 2013: हत्या का मामला

– 2015: अप्राकृतिक कृत्य की रिपोर्ट

– 2016: मारपीट और धमकी (पुरानी बस्ती)

– 2017: महिला से मारपीट और जान से मारने की धमकी

– 2019: सूदखोरी, ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी, मारपीट और धमकी

– 2025: आर्म्स एक्ट की कार्रवाई



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