World Rabies Day 2025: एक तरफ सड़कों पर कुत्तों का आतंक, दूसरी तरफ अस्पताल में रैबीज टीके की कमी

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September 30, 2025


World Rabies Day: रायपुर में एक तरफ आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों में रेबीज के टीकों की अपलब्धता में लगातार कमी बनी हुई है। रायपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंदों और बड़े अस्पतालों में हर रोज 100 से 150 लोग टीका लगवाने आते हैं, ऐसे में टीके की आपूर्ति एक बड़ी समस्या है।

Publish Date: Sun, 28 Sep 2025 09:41:03 AM (IST)

Updated Date: Sun, 28 Sep 2025 09:50:00 AM (IST)

World Rabies Day 2025: एक तरफ सड़कों पर कुत्तों का आतंक, दूसरी तरफ अस्पताल में रैबीज टीके की कमी

नईदुनिया प्रतिनिधि रायपुर: शहरी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रेबीज टीके की कमी है। अस्पतालों में एक डोज ही लग पा रहा है। अगर किसी को कुत्ते, बिल्ली, चूहे ने काट लिया और समय पर टीका नहीं लगाया तो रेबीज हो सकता है और उसे बचाना मुश्किल हो जाता है। इसलिए समय पर रेबीज का टीका लगवाना महत्वपूर्ण है।

बता दें कि शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना 10 से 20 लोग रेबीज का टीका लगवाने आते हैं। वहीं जिला अस्पताल और आंबेडकर में रोजाना 100 से अधिक लोग आते हैं। पड़ताल में सामने आया कि अधिकांश अस्पतालों में रेबीज टीके की आपूर्ति जरूरत के अनुरूप नहीं हो रही है।

  • खोखो पारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को हर महीने 400 टीके चाहिए, लेकिन केवल 40 डोज ही पहुंचते हैं।
  • राम नगर स्थित अस्पताल में 600 टीके की आवश्यकता होने के बावजूद स्टाक में मात्र 35 टीके हैं। इस कमी के चलते मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
  • राजा तालाब हमर अस्पताल में रोजाना पांच से सात लोग टीका लगवाने आते हैं। यहां अन्य अस्पतालों को सप्लाई देने के बावजूद सटाक पर्याप्त होने की वजह से मरीजों को परेशानी नहीं होती,
  • भाठागांव हमर अस्पताल में रोजाना 12-15 लोग टीका लगवाने आते हैं। यहां केवल एक डोज लगाने के बाद बाकी डोज के लिए जिला अस्पताल जाने की सलाह दी जाती है।
  • चंगोरा भाठा हमर अस्पताल में रोजाना 18-20 लोग टीका लगवाने आते हैं। यहां भी स्टाक की कमी के कारण दूसरे और तीसरे डोज के लिए आने वाले मरीजों को जिला अस्पताल भेजा जाता है।

छोटे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कमी जिला अस्पताल पहुंच रहे मरीज

छोटे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में टीके की कमी के कारण मरीज जिला अस्पताल की ओर बढ़ रहे हैं। इससे वहां भी भीड़ बढ़ रही है और इंतजार की समस्या और गंभीर हो गई है। भाठागांव हमर अस्पताल के एक स्टाफ का कहना है कि वे पूरी कोशिश कर रहे हैं कि मरीजों को कम से कम एक डोज तुरंत मिल सके। लेकिन पर्याप्त स्टाक न होने के कारण मरीजों को पूरी डोज देने में दिक्कत आ रही है। स्टाफ ने यह भी बताया कि कई बार टीके की आपूर्ति में देरी के कारण उन्हें मरीजों को दूसरे अस्पताल भेजना पड़ता है।

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टीके की आपूर्ति बढ़ाने के लिए प्रयास जारी हैं। जरूरत पड़ने पर लोकल खरीदी कर तत्काल अस्पतालों को उपलब्ध करवाया जाता है।

-सीएमएचओ डॉ. मिथिलेश चौधरी



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