रायपुर में खुद को एमएसएमई पीसीआई का चेयरमैन बताकर छत्तीसगढ़ ब्रांच का चेयरमेन और वाइस चेयरमेन बनाने के नाम पर 2 युवकों से 35 लाख की ठगी का वारदात सामने आया है। फर्जी ज्वाइनिंग लेटर और आईडी कार्ड लेकर ऑफिस पहुंचने पर मामले का खुलासा हुआ। आरोपी के खिलाफ अभनपुर थाने में मामला दर्ज हुआ है।
Publish Date: Sat, 08 Nov 2025 04:15:09 PM (IST)
Updated Date: Sat, 08 Nov 2025 04:18:49 PM (IST)

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर: रायपुर में रोजगार के नाम पर ठगी की एक और वारदात सामने आयी है। खुद को MSME PCI (भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संवर्धन परिषद्) का चेयरमैन बताने वाले दिल्ली के विजय कुमार चौरसिया ने दो युवकों से 35 लाख रुपये ठगी कर ली।
अभनपुर थाना पुलिस के आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ग्रीन पैराडाइज वैली, विशाल नगर रायपुर निवासी अनिल कुमार श्रीवास ने थाना अभनपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
उन्होंने बताया कि उनकी मुलाकात विजय कुमार चौरसिया से पांच अप्रैल 2023 को जोरा स्थित अशोका बिरयानी होटल में हुई थी। मुलाकात के दौरान विजय ने खुद को एमएसएमपीसीआई का चेयरमैन बताया और कहा कि वह छत्तीसगढ़ राज्य में संस्था की नई टीम गठित कर रहे हैं। इस टीम में अनिल श्रीवास को वाइस चेयरमैन और उनके साथी रौशन श्रीवास को चेयरमैन बनाने की बात कही गई।
इसके एवज में विजय चौरसिया ने अनिल श्रीवास से 15 लाख और रौशन श्रीवास से 20 लाख यानी कुल 35 लाख की मांग की। आरोप है कि छह अप्रैल 2023 को अभनपुर के लखन हिंदू होटल के बाहर दोनों से 2-2 लाख की नकद राशि ली गई, इसके बाद अप्रैल से दिसंबर 2023 के बीच विभिन्न माध्यमों नकद और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से पूरी रकम 35 लाख वसूली गई।
प्रति माह एक लाख रुपये वेतन
आरोपी विजय चौरसिया ने दोनों को फर्जी नियुक्ति पत्र और आइडी कार्ड भी प्रदान किए और दावा किया कि अगले महीने से एक लाख प्रतिमाह वेतन और आवासीय सुविधा दी जाएगी। साथ ही उन्होंने सरकारी मान्यता प्राप्त संस्था से जुड़कर उच्च पद और कमीशन कमाने का झांसा भी दिया।
कुछ महीनों बाद जब वेतन नहीं मिला और संदेह हुआ, तब अनिल और रौशन ने एमएसएमपीसीआइ कार्यालय रायपुर जाकर जानकारी ली। वहां बताया गया कि विजय चौरसिया द्वारा जारी किया गया नियुक्ति पत्र और आइडी कार्ड पूरी तरह फर्जी हैं।
आरोपी ने कहा- जो करना है कर लो
शिकायतकर्ता ने बताया कि नियुक्ति पत्र मिलने के बाद भी उनसे विभिन्न आयोजनों और बैठकों के खर्च भी करवाए गए, पर किसी भी तरह का वेतन या सुविधा नहीं दी गई। जब पीड़ितों ने अपने पैसे लौटाने की मांग की, तो विजय चौरसिया ने उन्हें धमकाया और कहा जो करना है कर लो, मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे। अनिल श्रीवास ने बताया कि विजय ने सरकारी संस्था का नाम लेकर योजनाओं में रोजगार और वेतन का लालच देकर कपटपूर्वक रकम हड़पी।